Kangra: देहरा में अजीबोगरीब मामला, एक्सीडैंट में टोटल लॉस हुई गाड़ी का कटा चालान

Edited By Vijay, Updated: 06 Feb, 2026 10:13 PM

a traffic ticket was issued for a vehicle that was declared a total loss 6 month

हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के देहरा क्षेत्र में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

देहरा (सेठी): हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के देहरा क्षेत्र में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक ऐसी गाड़ी का ऑनलाइन चालान काट दिया गया, जो पिछले करीब 7 माह से दुर्घटनाग्रस्त होकर एक जगह खड़ी है और चलने की हालत में भी नहीं है।

क्या है पूरा मामला
मामला आकाश गैस सर्विस देहरा से जुड़ा है। गैस सर्विस के मैनेजर पुरी ने बताया कि उनकी एक गाड़ी 8 जुलाई, 2025 को दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसे के बाद वाहन को टोटल लॉस (पूरी तरह क्षतिग्रस्त) घोषित कर दिया गया था। तब से यह गाड़ी एक ही स्थान पर खड़ी है, लेकिन हाल ही में मैनेजर के मोबाइल पर उस गाड़ी का चालान कटने का मैसेज आया, जिसे देखकर हर कोई हैरान है।

मैनेजर ने जताई नाराजगी, पहले भी हो चुकी है गलती
गैस सर्विस के मैनेजर ने व्यवस्था पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जो गाड़ी सड़क पर उतरी ही नहीं, उसका चालान कटना समझ से परे है। उन्होंने बताया कि यह पहली बार नहीं है, इससे पहले भी कांगड़ा फोरलेन के पास घट्टा क्षेत्र में इसी गाड़ी का चालान काटा गया था, जबकि गाड़ी वहां गई ही नहीं थी। शिकायत और जांच के बाद उस समय चालान रद्द कर दिया गया था, लेकिन अब दोबारा वैसी ही गलती दोहराई गई है।

अधिकारी झाड़ रहे पल्ला
हैरानी की बात यह है कि इस तकनीकी खामी या लापरवाही की जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं है। जब इस संबंध में विभाग से संपर्क किया गया तो आरटीओ देहरा करतार, आरटीओ कांगड़ा विकास और आरटीओ फ्लाइंग स्क्वायड असीम ने इस मामले में पूरी तरह अनभिज्ञता जताई। वहीं एसपी देहरा मयंक चौधरी ने कहा कि जिस क्षेत्र का यह मामला बताया जा रहा है, वह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

...तो न्याय के लिए कहां जाएंगे लोग?
बिना सड़क पर चले ही वाहनों के चालान आने से स्थानीय लोगों में भारी रोष है। लोगों का कहना है कि ऑनलाइन चालान प्रणाली में आ रही इन खामियों के कारण आम जनता को बेवजह मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। सवाल यह है कि अगर सिस्टम इसी तरह काम करेगा, तो लोग न्याय के लिए कहां जाएंगे?

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