Edited By Jyoti M, Updated: 03 Jan, 2026 04:06 PM

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में शातिर जालसाजों ने एक सेवानिवृत्त अधिकारी को अपना शिकार बनाया है। ठगों ने 'डिजिटल अरेस्ट' की एक सोची-समझी साजिश रचकर पीड़ित से 1.18 करोड़ रुपये ऐंठ लिए।
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में शातिर जालसाजों ने एक सेवानिवृत्त अधिकारी को अपना शिकार बनाया है। ठगों ने 'डिजिटल अरेस्ट' की एक सोची-समझी साजिश रचकर पीड़ित से 1.18 करोड़ रुपये ऐंठ लिए। खुद को जांच एजेंसी का बड़ा अधिकारी बताकर अपराधियों ने पीड़ित को मानसिक रूप से इस कदर तोड़ दिया कि उन्होंने अपनी सारी बचत ठगों के हवाले कर दी।
अपराध का तरीका: दहशत का वह मायाजाल
ठगों ने पीड़ित को जाल में फंसाने के लिए एक बेहद परिष्कृत (Sophisticated) पटकथा का इस्तेमाल किया:
वीडियो कॉल पर फर्जी अफसर: जालसाजों ने सीबीआई (CBI) अधिकारी बनकर वीडियो कॉल की और पीड़ित पर मनी लॉन्ड्रिंग (हवाला कारोबार) और ड्रग्स तस्करी जैसे संगीन मामलों में संलिप्त होने का झूठा आरोप लगाया।
सामाजिक प्रतिष्ठा का डर: पीड़ित को डराया गया कि यदि उन्होंने तुरंत सहयोग नहीं किया, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा, उनके बैंक खाते सील कर दिए जाएंगे और समाज में उनकी भारी बदनामी होगी।
डिजिटल निगरानी की धमकी: ठगों ने पीड़ित को विश्वास दिलाया कि वे चौबीसों घंटे 'डिजिटल सर्विलांस' पर हैं। उन्हें सख्त निर्देश दिए गए कि वे इस बारे में अपने परिवार, दोस्तों या स्थानीय पुलिस को सूचना न दें।
बेगुनाही के नाम पर वसूली: जांच का नाटक करते हुए अपराधियों ने कहा कि अपनी ईमानदारी साबित करने के लिए उन्हें अपनी सारी धनराशि 'सरकारी सुरक्षा खातों' में ट्रांसफर करनी होगी। घबराहट में पीड़ित ने बताए गए खातों में पैसे भेज दिए, जो बाद में फर्जी (म्यूल अकाउंट्स) पाए गए।
पुलिस की सक्रियता और कानूनी कार्यवाही
साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, शिमला में इस मामले को लेकर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। साइबर सेल के पुलिस अधीक्षक रोहित मालपानी ने पुष्टि की है कि जांच दल इन फर्जी बैंक खातों और कॉल करने वालों के लोकेशन को ट्रेस करने में जुटा है। यह हाल के दिनों में हिमाचल में हुई सबसे बड़ी साइबर ठगी में से एक मानी जा रही है।
सुरक्षा कवच: इन बातों का रखें विशेष ध्यान
पुलिस प्रशासन ने जनता को सचेत करते हुए कुछ महत्वपूर्ण बिंदु साझा किए हैं:
कानूनी हकीकत: भारतीय कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई शब्द या प्रावधान नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती।
तुरंत कार्रवाई: यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति जांच का डर दिखाकर कॉल करे, तो तुरंत फोन काट दें और किसी भी दबाव में न आएं।
गोपनीयता: कभी भी अपना ओटीपी (OTP), बैंक पासवर्ड, आधार या पैन कार्ड की जानकारी अनजान व्यक्ति को न दें।
रिपोर्टिंग: साइबर ठगी का आभास होते ही तुरंत हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें या स्थानीय पुलिस को सूचित करें।