शिमला हाईकोर्ट में बम की अफवाह फैलाने पर पुलिस का बड़ा एक्शन, मामला दर्ज कर शुरू की जांच

Edited By Vijay, Updated: 12 Feb, 2026 06:48 PM

bomb rumour in shimla highcourt

राज्य उच्च न्यायालय परिसर में बम और विस्फोटक लगाए जाने की झूठी सूचना फैलाने के मामले में शिमला पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकद्दमा दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है।

शिमला (संतोष): राज्य उच्च न्यायालय परिसर में बम और विस्फोटक लगाए जाने की झूठी सूचना फैलाने के मामले में शिमला पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकद्दमा दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस थाना सदर में बीएनएस की धारा 353(1)(बी), 351(3), 351(4), 152 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार यह मामला एक गुमनाम ई-मेल के आधार पर दर्ज किया गया है। यह ई-मेल उच्च न्यायालय के आधिकारिक ई-मेल पर प्राप्त हुई और बाद में इसे एसएसपी कार्यालय शिमला के माध्यम से संबंधित पुलिस थाना भेजा गया।

ई-मेल में दावा किया गया था कि शिमला स्थित उच्च न्यायालय के परिसर के अंदर और आसपास बम तथा आरडीएक्स आधारित आईईडी लगाए गए हैं, जिन्हें विस्फोट के लिए तैयार रखा गया है। इस सूचना के सामने आने के बाद अदालत परिसर में मौजूद कर्मचारियों और आम लोगों के बीच कुछ समय के लिए भय और चिंता का माहौल बन गया। सुरक्षा एजैंसियों ने तत्काल सतर्कता बरतते हुए परिसर की जांच भी की। पुलिस का कहना है कि ई-मेल में न केवल बम की झूठी सूचना दी, अपितु कुछ राजनीतिक आरोप भी लगाए गए, जिनमें तमिलनाडू की एक राजनीतिक सरकार और कुछ रणनीतिकारों का उल्लेख करते हुए कई अन्य आरोप शामिल हैं। जांच एजैंसियों का मानना है कि इस प्रकार की अफवाह लोगों में डर पैदा करने के उद्देश्य से भेजी गई प्रतीत होती है। पुलिस के अनुसार इस तरह की झूठी धमकी न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बनती है, अपितु सुरक्षा एजैंसियों के संसाधनों और समय पर भी अनावश्यक दबाव डालती है। इसलिए मामले को गंभीरता से लेते हुए अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

पुलिस थाना सदर के उपनिरीक्षक ओम प्रकाश को इस मामले की जांच सौंपी गई है। पुलिस अब संबंधित ई-मेल आईडी और तकनीकी माध्यमों की जांच कर रही है, जिससे संदेश भेजने वाले व्यक्ति की पहचान की जा सके। साइबर विशेषज्ञों की मदद से ई-मेल के स्रोत, आईपी एड्रैस और अन्य डिजिटल सुरागों को खंगाला जा रहा है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अफवाह या संदिग्ध संदेश मिलने पर उसे आगे फैलाने के बजाय तुरंत संबंधित प्रशासन या पुलिस को सूचित करें। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया और इलैक्ट्रॉनिक माध्यमों के जरिए झूठी सूचनाएं फैलाना दंडनीय अपराध है और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और प्रारंभिक जांच में किसी प्रकार का विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तार से जांच की जा रही है और आरोपी की पहचान होने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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