Edited By Jyoti M, Updated: 05 Jan, 2026 03:18 PM

मंडी/शिमला कुदरत के बदलावों के बीच हिमाचल प्रदेश एक बार फिर भूकंप के झटकों से दहल उठा है। सोमवार की दोपहर जब जनजीवन अपनी सामान्य गति से चल रहा था, तभी अचानक ज़मीन के भीतर हुई हलचल ने लोगों को घरों और दफ्तरों से बाहर भागने पर मजबूर कर दिया। इस बार इस...
हिमाचल डेस्क। मंडी/शिमला कुदरत के बदलावों के बीच हिमाचल प्रदेश एक बार फिर भूकंप के झटकों से दहल उठा है। सोमवार की दोपहर जब जनजीवन अपनी सामान्य गति से चल रहा था, तभी अचानक ज़मीन के भीतर हुई हलचल ने लोगों को घरों और दफ्तरों से बाहर भागने पर मजबूर कर दिया। इस बार इस कंपन का मुख्य केंद्र सूबे का मंडी जिला रहा।
दोपहर का वह खौफनाक मंजर
घड़ी में जब दोपहर के 12:57 बजे थे, तभी अचानक धरती में तेज थरथराहट महसूस की गई। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 3.6 दर्ज की गई है। राहत की बात यह रही कि तीव्रता बहुत अधिक नहीं थी, लेकिन जमीन से महज 5 किलोमीटर की गहराई पर इसका केंद्र होने के कारण झटके काफी साफ महसूस किए गए। मंडी के स्थानीय निवासियों के अनुसार, कंपन महसूस होते ही दहशत का माहौल बन गया और लोग सुरक्षा की दृष्टि से खुले मैदानों की ओर दौड़ पड़े।
देश के दो छोरों पर एक ही दिन हलचल
दिलचस्प और चिंताजनक बात यह है कि आज केवल पहाड़ी राज्य ही नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत का असम भी भूकंप से प्रभावित रहा। जहां असम में सुबह के वक्त 5.0 से अधिक तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, वहीं कुछ ही घंटों बाद हिमाचल की धरती डोल गई। लगातार आ रहे ये झटके हिमालयी बेल्ट में बढ़ती भूगर्भीय सक्रियता की ओर इशारा कर रहे हैं।
खतरे की नई घंटी: 'जोन 6' की चेतावनी
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के नवीनतम आंकड़ों ने हिमाचल की चिंता को और बढ़ा दिया है। नए भूकंपीय मानचित्र के विश्लेषण के अनुसार:
रेड जोन का विस्तार: अब पूरा हिमालयी क्षेत्र सबसे अधिक जोखिम वाले 'जोन 6' की श्रेणी में गिना जा रहा है।
अति-संवेदनशील जिले: शिमला, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी के साथ-साथ जनजातीय क्षेत्र चंबा, किन्नौर और लाहौल-स्पीति को भी 'अत्यधिक खतरे' वाले जिलों में शामिल किया गया है।
पुराना जख्म: इतिहास गवाह है कि 1905 में कांगड़ा ने 7.0 से अधिक तीव्रता का विनाशकारी भूकंप झेला था, जिसमें भारी तबाही हुई थी। वर्तमान में बढ़ती संवेदनशीलता को देखते हुए विशेषज्ञ अब अधिक सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।