नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर ले गया था किशोर...फिर बनाए संबंध; अब दोषी को मां की देखरेख में रिहाई

Edited By Swati Sharma, Updated: 27 Feb, 2026 02:04 PM

sirmour news teen convicted in rape case released under mother care

Sirmaur News: नाहन स्थित किशोर न्याय बोर्ड ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए नाबालिग से दुष्कर्म और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के मामले में दोषी पाए गए एक किशोर को दंड के बजाय सुधार का अवसर दिया है। बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट विकास कपूर की अध्यक्षता वाली...

Sirmaur News: नाहन स्थित किशोर न्याय बोर्ड ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए नाबालिग से दुष्कर्म और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के मामले में दोषी पाए गए एक किशोर को दंड के बजाय सुधार का अवसर दिया है। बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट विकास कपूर की अध्यक्षता वाली पीठ ने आरोपी को जेल भेजने के बजाय एक वर्ष की परिवीक्षा पर उसकी मां की देखरेख में रहने का आदेश दिया है।

क्या था मामला?

यह मामला 8 फरवरी 2022 को शिलाई थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया था। पीड़िता के परिजनों का आरोप था कि आरोपी उनकी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर पांवटा साहिब ले गया था, जहां उनके बीच शारीरिक संबंध बने। पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 363 (अपहरण) और 376 (दुष्कर्म) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच पूरी की और अदालत में आरोप पत्र पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 23 गवाहों के बयान दर्ज कराए। सुनवाई के दौरान किशोर न्याय बोर्ड ने पाया कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 16 वर्ष और आरोपी की उम्र मात्र 15 वर्ष थी। आदेश में कहा गया कि संबंध सहमति से थे। हालांकि कानून के तहत 18 वर्ष से कम आयु की बालिका के साथ सहमति से बने शारीरिक संबंध भी 'दुष्कर्म' की श्रेणी में आते हैं। बोर्ड ने इस मामले में 'सुधारात्मक न्याय' के सिद्धांत को प्राथमिकता दी है।

फैसले की मुख्य बातें

पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में बोर्ड ने आरोपी को अपहरण के आरोपों से बरी कर दिया। सामाजिक अन्वेषण रिपोर्ट (SIR) में आरोपी का कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं पाया गया। बोर्ड ने माना कि आरोपी स्वयं नाबालिग है, इसलिए उसे सुधार की आवश्यकता है। आरोपी को एक वर्ष के लिए अपनी मां की देखरेख में अच्छे आचरण की शर्त पर रिहा किया गया है। साथ ही, अधीक्षक-सह-परिवीक्षा अधिकारी को उसकी नियमित निगरानी और मार्गदर्शन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

सुधारात्मक न्याय की दिशा में कदम

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला किशोर न्याय व्यवस्था के मूल उद्देश्य को दर्शाता है, जहां बच्चों और किशोरों को अपराधी के रूप में देखने के बजाय उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाने पर जोर दिया जाता है। एक वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद बोर्ड आरोपी की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करेगा।

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