Sirmaur: 125 किलो चांदी के गर्भगृह में विराजीं मां काली, 7 तोले सोने का शिखर बना आकर्षण का केंद्र

Edited By Vijay, Updated: 22 Feb, 2026 10:42 PM

goddess kali is housed in 125 kg silver sanctum

नाहन शहर के ऐतिहासिक कालीस्थान मंदिर के नवनिर्मित गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चारण, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच रविवार को मां काली की प्रतिमा विधि-विधान से स्थापित कर दी गई।

नाहन (आशु): नाहन शहर के ऐतिहासिक कालीस्थान मंदिर के नवनिर्मित गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चारण, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच रविवार को मां काली की प्रतिमा विधि-विधान से स्थापित कर दी गई। जैसे ही गर्भगृह के पट खुले, चांदी की दिव्य आभा और आध्यात्मिक वातावरण ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। मंदिर के नए गर्भगृह के निर्माण में अब तक 125 किलोग्राम चांदी का उपयोग किया जा चुका है, जबकि 8 से 10 किलोग्राम चांदी का कार्य अभी शेष है। गर्भगृह के शिखर पर स्थापित कलश 7 तोले सोने से तैयार किया गया है, जो दूर से ही इसकी भव्यता का संदेश दे रहा है। 

निर्माण कार्य पर 4 से 5 करोड़ रुपए हुए खर्च
कालीस्थान मंदिर प्रबंधन समिति के अनुसार इस समूचे कार्य पर लगभग 4 से 5 करोड़ रुपए व्यय किए जा चुके हैं। यह निर्माण कार्य स्थानीय श्रद्धालुओं एवं दानी सज्जनों के सहयोग से संपन्न हुआ है।  इस अवसर पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, सांसद सुरेश कश्यप तथा पूर्व विधायक कंवर अजय बहादुर सिंह ने मंदिर पहुंचकर मां काली के चरणों में शीश नवाया। इस दौरान मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष बाबा किशोरी नाथ, उपाध्यक्ष योगेश गुप्ता, सचिव देवेंद्र अग्रवाल, कोषाध्यक्ष शरद बंसल, सदस्य दुर्गेश चौधरी, अमर सिंह ठाकुर, सुखचैन ठाकुर, सोम कुमार शर्मा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। मां काली की प्रतिमा स्थापना से पूर्व मंदिर में 5 दिवसीय चंडी पाठ का आयोजन किया गया। समापन अवसर पर हवन के पश्चात गर्भगृह में प्रतिमा स्थापित की गई और भंडारे का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण किया। 

बनारस व जयपुर के कारीगरों ने साकार किया दिव्य स्वप्न
इस भव्य निर्माण के पीछे कुशल कारीगरों की महीनों की तपस्या छिपी है। गर्भगृह में की गई बारीक चांदी की नक्काशी का कार्य बनारस से आए अनुभवी कलाकारों ने किया है। हर आकृति और हर उभार में उनकी कला व भक्ति का सुंदर समन्वय दिखाई दे रहा है। वहीं शिखर पर स्थापित स्वर्ण कलश को जयपुर के पारंपरिक स्वर्णकारों ने तैयार किया। सोने की चमक में न केवल शिल्प कौशल, बल्कि सांस्कृतिक विरासत की गरिमा भी प्रतिबिंबित होती है। महज 4 महीनों में कारीगरों ने दिन-रात परिश्रम कर इस दिव्य स्वप्न को साकार किया है। ऐतिहासिक कालीस्थान मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है, लेकिन अब भव्य गर्भगृह ने इसकी दिव्यता और गरिमा में एक नई आभा जोड़ दी है। 

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