Shimla: 24 घंटे पानी देने वाले प्रोजैक्ट के तहत जल प्रबंधन कंपनी के 100 करोड़ रुपए ऋण लेने पर भड़के पार्षद

Edited By Kuldeep, Updated: 29 Nov, 2025 06:46 PM

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राजधानी शिमला को 24 घंटे पानी देने वाले विश्व बैंक प्रोजैक्ट को पूरा करने के लिए जल प्रबंधन कंपनी के 100 करोड़ रुपए के ऋण लेने पर नगर निगम पार्षद भड़क गए हैं।

शिमला (वंदना): राजधानी शिमला को 24 घंटे पानी देने वाले विश्व बैंक प्रोजैक्ट को पूरा करने के लिए जल प्रबंधन कंपनी के 100 करोड़ रुपए के ऋण लेने पर नगर निगम पार्षद भड़क गए हैं। निगम हाऊस में पार्षदों ने शनिवार को कंपनी के 100 करोड़ रुपए के ऋण लेने के फैसले पर आपत्ति जताई है। पार्षद कमलेश मैहता और सिमी नंदा ने इस मामले को सदन के समक्ष उठाया। पार्षदों ने आरोप लगाया कि विश्व बैंक प्रोजैक्ट के तहत शहर में पानी और सीवरेज व्यवस्था को सुधारने के लिए 1817 करोड़ रुपए का प्रोजैक्ट तैयार किया गया है, बावजूद इसके अब कंपनी बैंक से 100 करोड़ रुपए का ऋण ले रही है। पार्षद कमलेश मैहता ने कहा कि वर्ल्ड बैंक से अब तक 587.19 करोड़ रुपए इस प्रोजैक्ट के तहत मिल चुके हैं, जबकि शिमला को सतलुज नदी से पानी अब तक नहीं पहुंच पाया है। पार्षदों ने सवाल खड़े किए हैं कि जब वर्ल्ड बैंक से प्रोजैक्ट के तहत पैसा मिल रहा है तो बैंक से लोन कंपनी क्यों ले रही है। पार्षद सिमी नंदा ने कहा कि 3 प्रमुख कॉम्पोनैंट के तहत विश्व बैंक से पैसा मिल रहा है।

नगर निगम 51 प्रतिशत का हिस्सेदार कंपनी में है ऐसे में कंपनी को जवाब देना होगा कि आखिर किस प्रोजैक्ट पर कितना पैसा खर्च किया गया है। इसकी पूरी ऑडिट रिपोर्ट कंपनी को सदन में रखनी होगी। इसमें निगम के सभी पार्षदों ने समर्थन किया। पार्षदों ने साफ कहा कि जब तक कंपनी की ओर से पैसा कब कहां कितना खर्च किया गया है। इसकी पूरी रिपोर्ट सदन पटल पर नहीं रखी जाती है, तब तक नगर निगम 100 करोड़ रुपए के लोन लेने को अनुमति नहीं देगा। मेयर सुरेंद्र चौहान ने पार्षदों के विरोध के बाद जल प्रबंधन कंपनी के अधिकारियों को अगले हाऊस में अब तक प्रोजैक्ट के तहत खर्च की गई राशि का पूर ब्यौरा सदन के समक्ष पेश करने के आदेश दिए हैं। इसमें ऑडिट रिपोर्ट, बैलैंस शीट समेत अन्य वित्तीय रिपोर्ट हाऊस के समक्ष रखनी होगी, ताकि प्रोजैक्ट के तहत कहां कितना पैसा खर्च किया गया है।

इसकी पूरी जानकारी पार्षदों को मिल सके और प्रोजैक्ट के तहत किए जा रहे खर्च पर पारदर्शिता बनी रह सके। पार्षदों ने इसमें पैसा खर्च करने पर अनियमितताएं होने का संदेह भी जताया है। कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि अब तक इस प्रोजैक्ट के तहत 239.99 करोड़ रुपए की कंपनी को मिले हैं। ऐसे में प्रोजैक्ट को पूरा करने के लिए कंपनी 100 करोड़ रुपए का लोन लेना चाहती है, जिसे बीते दिनों निदेशक मंडल की बैठक में मंजूरी भी मिल चुकी है, लेकिन अब निगम पार्षद लोन लेने के मामले पर पहले कंपनी की ऑडिट रिपोर्ट पेश करने की मांग कर रहे हैं। इस मामले को लेकर सदन में काफी हंगामा भी पार्षदों ने किया। पार्षदों ने कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि शहर में पानी की राशनिंग चल रही है तीसरे दिन भी लोगों को पानी नहीं मिल रहा है। कई इलाकों में चौथे दिन पानी आ रहा है।

इस पर कंपनी के अधिकारियों ने लो वोल्टेज का हवाला देकर मामले से पल्ला झाड़ा। मेयर ने कंपनी के अधिकारियों को शहर में पानी की आपूर्ति को सुधारने व लोगों को पानी उपलब्ध करवाने के आदेश दिए हैं। लो वोल्टेज से पंपिंग स्टेशनों में पंपिंग भी बाधित हो रही और और वाटर टैंक में लेवल नहीं बनने से शहर में आपूर्ति बाधित हो रही है, जिसे सुधारने के आदेश दिए गए हैं। मेयर ने पानी के मुद्दे को लेकर 6 दिसम्बर को बैठक बुलाई है। वहीं पार्षद सिमी नंदा और नरेंद्र ठाकुर ने जल प्रबंधन कंपनी के निदेशक मंडल में 3 पार्षदों को शामिल करने की मांग की। सदन से प्रस्ताव पारित कर मंजूरी के लिए प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा।

हाऊस में कंपनी के एम.डी. व अन्य विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति जरूरी, मेयर ने सभी विभागों के सचिव को लिखा पत्र
नगर निगम हाऊस में पार्षद नरेंद्र ठाकुर ने मांग उठाई कि जल प्रबंधन कंपनी के प्रबंध निदेशक को बैठक में बुलाया जाना चाहिए। शहर में पानी से जुड़ी अहम जानकारी हाऊस में कंपनी के एम.डी. को देनी चाहिए, ऐसे में उन्हें प्रबंध निदेशक को निगम की हर मासिक बैठक में मौजूद रहने के निर्देश सदन की ओर से दिए जाने चाहिए। वहीं मेयर ने निगम अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि हाऊस में पार्षद जो मामले उठाते हैं। अधिकारियों को गंभीरता से उस कार्य को पूरा करना होगा। वहीं मेयर ने लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, विद्युत विभाग समेत अन्य सभी विभागों के अधिकारियों को बैठक में बुलाने के लिए सभी विभागों के सचिव को पत्र लिखकर अधिकारियों को उपस्थित रहने के निर्देश देने को लेकर भी प्रस्ताव पारित किया है, ताकि शहर से जुड़े मामलों पर अधिकारियों की उपस्थिति सदन में हो सके।

बरसात में गिरे पेड़ों को हटाए विभाग, नहीं तो निगम श्मशान घाट में प्रयोग लाएगा लकड़ी
शहर में बरसात के दौरान सड़क के किनारे व वार्डों में जगह-जगह पेड़ गिरे थे। पेड़ों की लकड़ी सड़कों के किनारे पड़ी हुई है। पार्षद रचना भारद्वाज ने मामला उठाया कि विभाग की ओर से अब तक गिरे पेड़ों की लकड़ी को नहीं हटाया गया है, इससे वार्ड के कई रास्ते बंद पड़े हुए हैं। लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है। सड़क किनारे लकड़ी होने से लोग गाड़ियां पार्क नहीं कर पा रहे हैं। इस पर आशा शर्मा, निशा ठाकुर, कांता सुयाल समेत कई अन्य पार्षदों ने कहा कि अपने-अपने वार्डों में लकड़ी पड़े होने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। इस पर मेयर ने वन विभाग के अधिकारियों को बरसात में गिरे पेड़ों की लकड़ी को हटाने के निर्देश दिए हैं। मेयर ने यह भी कहा यदि विभाग लकड़ी नहीं उठा सकता तो नगर निगम इस लकड़ी को शहर के श्मशानघाट तक पहुंचा देगा, ताकि इस लकड़ी का प्रयोग हो सके। विभाग को जल्द ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।

लंच डिप्लोमेसी के बाद नाराज चल रहे कांग्रेसी पार्षदों ने हाऊस में दिखाई एकजुटता, भाजपा का अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्लान हुआ फेल
शिमला नगर निगम के मेयर-डिप्टी मेयर के अढ़ाई साल के कार्यकाल को 5 वर्ष तक बढ़ाने से सरकार के फैसले से नाराज चल रहे कांग्रेसी पार्षदों ने शनिवार को निगम हाऊस में एकजुटता दिखाई। पिछले हाऊस में कांग्रेस के 15 पार्षदों ने सरकार के इस फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई थी, इसके बाद से मेयर व डिप्टी मेयर के बीच काफी दूरियां भी आई गई थी, लेकिन बीते रोज मेयर और डिप्टी मेयर ने नाराज पार्षदों के साथ बैठक कर सभी गीले शिकवे दूर किए और शनिवार को निगम हाऊस में सभी ने एकजुटता दिखाई, हालांकि भाजपा पार्षदों ने सदन में कार्यकाल बढ़ाने के फैसले का विरोध किया। मेयर की ओर से पार्षदों के लिए बीते रोज लंच रखा गया था। इस लंच डिप्लोमेसी का असर शनिवार को हुए निगम हाऊस में साफ तौर पर देखा गया। सभी पार्षद एकजुट होकर निगम हाऊस में पहुंचे, जिससे तमाम अटकलों पर विराम लग गया।

भाजपा पार्षद कांग्रेसी पार्षदों के साथ मिलकर अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन मेयर ने समय रहते डैमेज कंट्रोल कर लिया है। ऐसे में सदन में पार्षद सरोज ठाकुर ने कहा कि मेयर की कुर्सी पर महिला का बैठाया जाना था, लेकिन कांग्रेस सरकार ने महिलाओं के हक पर डाका डाला है। ऐसे में भाजपा पार्षद इसका कड़ा विरोध करते हैं। कांग्रेेसी पार्षदों की एकता के साथ ही भाजपा के अविश्वास प्रस्ताव लाने के प्लान पर पूरी तरह से पानी फिर गया है। वहीं मेयर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि यह मामला कोर्ट में चल रहा है, ऐसे में भाजपा पार्षदों को इस पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। भाजपा पार्षदों ने सदन के भीतर इस पर अपना विरोध जताया।

भराड़ी वार्ड से नगर निगम शुरू करेगा क्यूआर स्कैनर कोड, भवन मालिकों से 100 रुपए वसूली जाएगी फीस
भराड़ी वार्ड से नगर निगम पायलट प्रोजैक्ट के तहत क्यूआर स्कैनर कोड लगाने जा रहा है। घरों के बाहर यह क्यूआर कोड यूनिक आईडी प्लेट लगाई जा रही है। इससे डोर-टू-डोर गारबेज कलैक्शन योजना के तहत गारबेज कलैक्टर जब घरों से कूड़ा उठाने के लिए आएगा तो वह घरों के बाहर क्यूआर कोड को स्कैन करेगा, इससे निगम प्रशासन को गारबेज कलैक्टर के ड्यूटी पर होने व घरों से कचरा उठाने की सूचना मिल सकेगी। इसमें गारबेज कलैक्टर ने किस समय पर घरों से कचरा उठाया कितने बजे ड्यूटी पर पहुंचा। इन सब की जानकारी मिल सकेगी। यहीं नहीं सफाई कर्मचारी भी फील्ड में काम कर रहा है।

इसको भी क्यूआर कोड स्कैन करना पड़ेगा। नगर निगम पायलट प्रोजैक्ट के तौर पर इसे भराड़ी वार्ड से शुरू करने जा रहा है। क्यूआर कोड लगाने की एवज में नगर निगम भवन मालिकों से इसका 100 रुपए शुल्क भी वसूल करेगा। शनिवार को नगर निगम हाऊस से इस योजना को मंजूरी प्रदान कर दी है। खास बात यह भी रहेगी कि इस क्यू.आर. कोड को स्कैन कर भवन मालिक गारबेज का बिल और प्राॅपर्टी टैक्स का भुगतान भी कर सकेंगे।

शहर के बालूगंज वार्ड में बनेगी स्टील स्ट्रक्चर पार्किंग, समरहिल में दुकानें बनाकर कमाई करेगा निगम
बालूगंज वार्ड के तहत चक्कर में नगर निगम स्टील स्ट्रक्चर पार्किंग का निर्माण करने जा रहा है। इसके साथ ही चेंजिंग रूम का निर्माण भी किया जाना है। इसके लिए निगम सदन की बैठक में 35 लाख 58 हजार 300 रुपए का एस्टीमेट को मंजूरी प्रदान की गई है। इसके अलावा समरहिल क्षेत्र में नगर निगम सड़क किनारे दुकानें बनाएगा। मौजूदा समय में यहां पर दोपहिया वाहन निगम की जमीन पर खड़े किए जा रहे हैं। अब निगम इस जगह पर दुकानें बनाकर इसे आगे कारोबारियों को देगा।

इससे निगम को कमाई हो सकेगी। इसके लिए 13 लाख 67 हजार रुपए के एस्टीमेट को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। वहीं नगर निगम न्यू शिमला वार्ड में नव निर्मित आंगनबाड़ी केंद्र का आबंटन बाल विकास विभाग को किया जाएगा। इसके लिए 6 हजार रुपए किराया निर्धारित किया गया है। वहीं सामुदायिक भवन चलौठी को ग्राम सुधार सभा को जिम व रीडिंग रूम के प्रयोग के लिए दिया जाएगा।

इसके लिए कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी मौके पर जाकर किराया निर्धारण करने को लेकर फैसला करेगी। वहीं स्मार्ट सिटी प्रोजैक्ट के तहत संजौली के वाटर रेजरवायर के पास वरिष्ठ नागरिकों के लिए क्लब, सामुदायिक भवन और चिल्ड्रन रूम के निर्माण को भी सदन ने मंजूरी प्रदान की है। बैठक में निगम के विधि विभाग में कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए स्थायी अधिवक्ताओं की रिटेनरशिप फीस के हकदार फीस मिलने इत्यादि के मामले पर चर्चा की है। नगर निगम के मज्याठ वार्ड में 15 लाख 91 हजार 500 रुपए की लागत से हैंडपम्प से राजकीय प्राथमिक पाठशाला तक एम्बुलैंस रोड का निर्माण करने को भी मंजूरी प्रदान की गई है।

वहीं टुटू वार्ड के तहत भी 29 लाख 91 हजार 400 रुपए की लागत से एयरपोर्ट रोड से बीपीएल कालोनी विजय नगर तक एम्बुलैंस रोड का निर्माण होगा। बैठक में नगर निगम शिमला में मजदूरों आऊटसोर्स कर्मचारियों, दैनिक वेतनभोगी व ड्राइवरों को बढ़ी हुई दरों के अनुसार वेतन देने के मामले को मंजूरी प्रदान की गई है। निगम द्वारा बुैक कैफे छोटा शिमला, चौड़ा मैदान व न्यू शिमला की अगले 1 साल के लिए समयावधि बढ़ाई गई है।

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