शिमला में बंदरों का आतंक, लोगों से पानी से लेकर बर्गर तक छीन रहे

Edited By Jyoti M, Updated: 27 Feb, 2026 02:45 PM

monkey terror in shimla

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला इन दिनों बंदरों की बढ़ती दहशत से जूझ रही है। पर्यटन सीजन के बीच शहर के प्रमुख इलाकों रिज, मॉल रोड, जाखू और आसपास के क्षेत्रों में बंदरों की गतिविधियां लगातार बढ़ गई हैं। हालात ऐसे हैं कि यदि किसी को प्यास लगे और वह हाथ...

शिमला, (तनुजा): हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला इन दिनों बंदरों की बढ़ती दहशत से जूझ रही है। पर्यटन सीजन के बीच शहर के प्रमुख इलाकों रिज, मॉल रोड, जाखू और आसपास के क्षेत्रों में बंदरों की गतिविधियां लगातार बढ़ गई हैं। हालात ऐसे हैं कि यदि किसी को प्यास लगे और वह हाथ में बिसलेरी की बोतल लेकर चले तो बंदर झपटा मारकर उसे छीन लेते हैं। इतना ही नहीं, जूस, कोल्ड ड्रिंक, बर्गर, चिप्स या फल जैसे खाद्य पदार्थ भी उनके निशाने पर हैं। स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए यह समस्या अब गंभीर रूप ले चुकी है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बंदर समूह बनाकर बैठते हैं और जैसे ही किसी व्यक्ति के हाथ में खाने-पीने का सामान दिखाई देता है, वे अचानक हमला कर देते हैं। कई बार तो वे लोगों के बैग तक खींच लेते हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रिज मैदान और मॉल रोड जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में बंदरों की 'नाकाबंदी' जैसी स्थिति बन जाती है, जिससे लोगों का आराम से चलना भी मुश्किल हो जाता है।

स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि बंदरों की वजह से उनका व्यापार भी प्रभावित हो रहा है। कई पर्यटक खुले में खाना खाने से कतराने लगे हैं। कुछ मामलों में बंदरों द्वारा झपटा मारने से लोग गिरकर चोटिल भी हुए हैं। हालांकि लोग अनजाने में उन्हें खाना खिला देते हैं, जिससे वे मानव बस्तियों के आदी हो गए हैं। यही कारण है कि अब वे बिना डर के लोगों से सामान छीन लेते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक लोग बंदरों को खाना देना बंद नहीं करेंगे और कूड़ा प्रबंधन सख्ती से लागू नहीं होगा, तब तक स्थिति में सुधार मुश्किल है।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खुले में खाने-पीने की वस्तुएं लेकर न घूमें और बंदरों को उकसाने से बचें। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को दीर्घकालिक रणनीति बनानी चाहिए, जिसमें बंदरों के प्राकृतिक आवास का संरक्षण, कूड़ा प्रबंधन में सुधार और जनजागरूकता को प्राथमिकता दी जाए। फिलहाल स्थिति यह है कि शिमला के कई इलाकों में बंदरों का खौफ साफ महसूस किया जा सकता है।

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