Shimla: HRTC कर्मचारियों के हिम बस कार्ड बनाने पर बवाल

Edited By Kuldeep, Updated: 12 Jan, 2026 05:48 PM

shimla hrtc employees bus cards controversy

एचआरटीसी कर्मचारी संगठनों ने निगम प्रबंधन द्वारा बनाए जा रहे हिम बस कार्ड को लेकर बवाल खड़ा कर दिया है। यह बवाल उस समय खड़ा हुआ जब कर्मचारियों के भी हिम बस कार्ड बनाने की बात सामने आई।

शिमला (राजेश): एचआरटीसी कर्मचारी संगठनों ने निगम प्रबंधन द्वारा बनाए जा रहे हिम बस कार्ड को लेकर बवाल खड़ा कर दिया है। यह बवाल उस समय खड़ा हुआ जब कर्मचारियों के भी हिम बस कार्ड बनाने की बात सामने आई। निगम कर्मचारियों के भी हिम बस कार्ड बनाने के विरोध में निगम के करीब 5 संगठन एकजुट हो गई है। हिमाचल परिवहन कर्मचारी संघ, परिवहन मजदूर संघ, सर्व कर्मचारी यूनियन, तकनीकी कर्मचारी, चालक-परिचालक एवं निरीक्षक स्टाफ संगठन के पदाधिकारियों समर चौहान, जिया लाल, प्यार सिंह, हरीश पराशर, ऋषि लाल, संजय बड़वाल, खेमेन्द्र गुप्ता, हितेन्द्र कंवर, खेम चंद, हरि कृष्ण, हरि लाल, पदम शर्मा, बाल कृष्ण एवं सुंदर लाल ने उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से पता चल रहा है कि निगम कर्मचारियों को भी हिम बस कार्ड बनाने होंगे। जिसका संगठन पूरा विरोध करते हैं। फिलहाल निगम प्रबंधन की ओर से ऐसी कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। यदि भविष्य में इस संबंध में कोई भी अधिसूचना जारी की जाती है, तो उसका संगठित रूप से पूर्ण विरोध किया जाएगा।

निजी आईटी कंपनियों को लाभ पहुंचाने को बनाए जा रहे हिम बस कार्ड
संघों के पदाधिकारियों ने कहा कि हिम बस कार्ड बनाने को कोई भी निर्णय केवल निजी आईटी कंपनियों के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया प्रतीत होता है। पदाधिकारियों ने कहा कि हिम बस कार्ड में प्रति कार्ड की एक बार ट्रांजैक्शन पर 17 पैसे कंपनी को जाएंगे। यदि ऐसा निर्णय लिया जाता है, तो यह साबित हो जाएगा कि निगम प्रबंधन कर्मचारियों के हितों की अनदेखी कर रहा है और जब-जब कर्मचारियों के मनोबल को गिराने का अवसर मिलता है, तब-तब ऐसे निर्णय लिए जाते हैं।

निगम की आर्थिकी सुदृढ़ प्रयास का स्वागत लेकिन कर्मचारी विरोधी निर्णय सहन नहीं करेंगे
हिमाचल परिवहन कर्मचारी संघ के महासचिव खमेंद्र गुप्ता ने कहा कि आईटी के माध्यम से निगम की आर्थिकी को सुदृढ़ करने के प्रयासों का वे स्वागत करते हैं, लेकिन इसकी आड़ में किसी भी प्रकार के कर्मचारी-विरोधी निर्णय को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि निगम प्रबंधन आईटी व्यवस्था को सशक्त करने में लगाई जा रही ऊर्जा का आधा हिस्सा भी जमीनी वास्तविकताओं की जांच एवं सुधार में लगाए, तो निश्चित रूप से बेहतर परिणाम सामने आ सकते हैं।

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