Shimla: लाखों लोगों की जान बचाने वाले हिम केयर को घोटाला कहना बेशर्मी : जयराम

Edited By Kuldeep, Updated: 26 Mar, 2026 09:17 PM

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नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि लाखों लोगों की जान बचाने वाले, लोगों में इलाज करवाने का हौसला देने वाले हिम केयर को मुख्यमंत्री द्वारा घोटाला कहना बेशर्मी है।

शिमला (ब्यूरो): नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि लाखों लोगों की जान बचाने वाले, लोगों में इलाज करवाने का हौसला देने वाले हिम केयर को मुख्यमंत्री द्वारा घोटाला कहना बेशर्मी है। सरकार को यह बात आज भी चुभती है कि लोगों की जुबान पर भाजपा की दर्जनों योजनाएं रटी हुई हैं, लेकिन इस सरकार के मंत्रियों के पास भी 3 साल बाद बताने के लिए कोई ढंग की 3 योजनाएं नहीं हैं। इसलिए लोगों को जिंदगी देने वाली योजनाओं को बंद करने की साजिशें कर रहे हैं। शिमला से जारी बयान में जयराम ठाकुर ने कहा कि जिन योजनाओं ने लोगों की जिंदगी बदली उन्हें बंद कर यह सरकार भले ही राजनैतिक बदले की कार्रवाई करे, लेकिन प्रदेश के लोग सरकार को माफ नहीं करेंगे।

हमारी सरकार में ही हिम केयर और आयुष्मान के तहत साढ़े 5 लाख से ज्यादा लोगों का इलाज हुआ, जिस पर 500 करोड़ से ज्यादा रुपए खर्च हुए। मुख्यमंत्री एक वैल्फेयर स्टेट का मतलब और उसका भाव नहीं समझ सकते हैं। वह कभी हिम केयर के उन लाभार्थियों से नहीं मिले, जिन्होंने अपनी आर्थिक हालत को देखते हुए इलाज करवाने के बजाय बीमारी छुपाने का फैसला किया, लेकिन हिम केयर ने उन्हें नई जिंदगी दी। 3 साल के कार्यकाल में जब उनके पास दिखाने के लिए अपनी नाकामियों के अलावा कुछ नहीं तो सरकार साजिशों पर उतर आई है। मित्रों पर ही मेहरबानी के मॉडल से चलने वाली सरकार देने के बजाय लेने, खोलने के बजाय बंद करने के काम में लगी है।

ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री क्या कहते हैं उन्हें खुद पता नहीं चलता है। मुख्यमंत्री ने 25 मार्च को सदन में कहा कि हमने 972 करोड़ खर्च किए, उसके 5 मिनट बाद बोला कि 750 करोड़ रुपए खर्च किए। 19 मार्च को सदन में बोला कि 1072 करोड़ खर्च किए। भाजपा ने सिर्फ 450 करोड़ खर्च किए। तीनों बातें मुख्यमंत्री ने सदन में इसी सत्र में ही कही हैं, अब सवाल यह है कि उनकी कौन सी बात सही है। अस्पतालों में सर्जिकल टाइम्स नहीं है। इसलिए लोगों के ऑप्रेशन टालने पड़े। सवाल यह है कि मुख्यमंत्री ने आखिर वह घोटाला साढ़े 3 सालों से क्यों होने दिया? अगर कोई गड़बड़ी हुई तो मुख्यमंत्री ने 3 साल तक यह होने क्यों दी? इतने दिनों में घोटाला करने वालों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? जिस तरह की राजनीति मुख्यमंत्री कर रहे हैं, उससे हिमाचल का भला होने वाला नहीं है।

 

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