Shimla: विदेशी सेब के बढ़ते आयात से 4,500 करोड़ की आर्थिक पर खतरा : सुक्खू

Edited By Kuldeep, Updated: 15 Jan, 2026 08:53 PM

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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि विदेशी सेब के बढ़ते आयात से हिमाचल प्रदेश की 4,500 करोड़ रुपए की सेब आर्थिकी पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।

शिमला (कुलदीप): मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि विदेशी सेब के बढ़ते आयात से हिमाचल प्रदेश की 4,500 करोड़ रुपए की सेब आर्थिकी पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे में प्रदेश के 2.5 लाख सेेब बागवानों के हित में केंद्र सरकार से शत-प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की मांग की है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात करके इस विषय को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने प्रदेश के सेब उत्पादकों के हितों की पुरजोर वकालत करते हुए कहा कि बागवानों की समस्याओं को लेकर केंद्र सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है। उन्होंने सेब को विशेष श्रेणी में शामिल करने की मांग की, ताकि प्रदेश के किसानों को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा से संरक्षण मिल सके। उन्होंने हिमाचल में सेब उत्पादन के जुलाई से नवम्बर तक की अवधि के दौरान सेब आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया। इसके अतिरिक्त ऑफ सीजन में विदेशी सेबों की डंपिंग को रोकने के लिए आयात शुल्क को बढ़ाकर शत-प्रतिशत करने तथा सेब आयात पर मात्रात्मक प्रतिबंध (क्वांटीटेटिव रिस्ट्रिक्शन) लगाने का भी आग्रह किया।

उन्होंने केंद्रीय मंत्री को बताया कि प्रदेश के बागवानों का प्रतिनिधिमंडल गत मंगलवार को उनसे मिला तथा न्यूजीलैंड के सेब पर आयात शुल्क को घटाने से प्रदेश के सेब उत्पादकों को हो रहे नुक्सान के संबंध में चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राज्य के कुल फल उत्पादन का करीब 80 फीसदी सेब है, जिससे लगभग 10 लाख मानव-दिवस सृजित होते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यापार नीतियों से छोटे और सीमांत किसान संकट में हैं और इनसे देश के किसानों की बजाय विदेशी कंपनियों को लाभ पहुंच रहा है। उन्होंने न्यूजीलैंड के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में यहां से सेब आयात अढ़ाई गुना बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि अप्रैल से अगस्त के दौरान न्यूजीलैंड के सेब पर 25 फीसदी शुल्क छूट के कारण कोल्ड स्टोरेज में रखे गए हिमाचल के सेब के दाम गिर रहे हैं, जिससे ऑफ सीजन व्यापार पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।

आरडीजी 10,000 करोड़ प्रतिवर्ष करने की मांग
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र्रीय मंत्री को राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को न्यूनतम 10,000 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष निर्धारित किए जाने की मांग की। उन्होंने पहाड़ी राज्यों के लिए अलग से एक ग्रीन फंड के गठन की पैरवी करते हुए कहा कि इसमें प्रतिवर्ष 50,000 करोड़ रुपए का प्रावधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने हॉरिजैंटल डिवैल्यूएशन के लिए राज्य द्वारा प्रस्तावित संशोधित फाॅर्मूले की जानकारी भी दी, इसमें वन एवं वनों पर आधारित पारिस्थितिकी के मानदंड का विशेष ध्यान रखने की मांग की गई है। उन्होंने आपदा जोखिम सूचकांक को पुन: परिभाषित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि हिमालयी क्षेत्रों की तुलना देश के अन्य क्षेत्रों से नहीं की जा सकती है।

भाजपा नेतृत्व की चुप्पी पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश के भाजपा नेतृत्व की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने भाजपा नेताओं से आग्रह किया कि प्रदेश हित तथा सेब उत्पादकों के मुद्दों को केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष उठाएं। केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री के साथ वरिष्ठ अधिकारियों की टीम भी साथ थी।

नड्डा से आयुष्मान भारत योजना में मांगा केंद्रीय सहयोग
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से भेंट करके हिमाचल प्रदेश से जुड़ीं परियोजनाओं से संबंधित मुद्दों को केंद्र सरकार के समक्ष रखने तथा प्रदेश के विकास में सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र को सुदृढ़ करने के दृष्टिगत केंद्रीय मंत्री से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास से जुड़ीं परियोजनाओं सहित आयुष्मान भारत योजना में केंद्रीय सहयोग का आग्रह किया। जगत प्रकाश नड्डा ने हिमाचल को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।

खट्टर-गोयल से आज मुलाकात संभव
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और पीयूष गोयल से मुलाकात करने की संभावना है। वह केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पी.एस.यू.) और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सी.पी.एस.यू.) द्वारा संचालित जलविद्युत परियोजनाओं में राज्य की मुफ्त बिजली हिस्सेदारी बढ़ाने का आग्रह कर सकते हैं। इसी तरह शानन प्रोजैक्ट हिमाचल प्रदेश को हस्तांतरित करने एवं बी.बी.एम.बी. से जुड़े विषय पर चर्चा हो सकती है। वह प्रदेश में टाऊनशिप विकास के लिए केंद्रीय निधि की मांग कर सकते हैं। इसके अलावा शहरी विकास से जुड़े प्रोजैक्टों पर चर्चा कर सकते हैं। इसी तरह केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने से जुड़े विषयों पर चर्चा कर सकते हैंए साथ ही मुख्यमंत्री कांग्रेस आलाकमान से भी सत्ता-संगठन से जुड़े विषयों पर अलग से पार्टी नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं।

 

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