Edited By Kuldeep, Updated: 21 Jan, 2026 11:34 PM

बिजली बोर्ड प्रदेश भर में पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटरों से बदल रहा है। ऐसे में स्मार्ट बिजली मीटर लगाए जाने से बिजली सबसिडी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
शिमला (राजेश): बिजली बोर्ड प्रदेश भर में पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटरों से बदल रहा है। ऐसे में स्मार्ट बिजली मीटर लगाए जाने से बिजली सबसिडी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यही नहीं 125 यूनिट तक मिलने वाली मुफ्त बिजली की सुविधा पूरी तरह से पहले की तरह जारी रहेगी और स्मार्ट मीटर लगने से बिजली के बिलों में कोई बढ़ौतरी नहीं होगी।
बिजली बोर्ड प्रबंधन ने सोशल मीडिया पर स्मार्ट मीटर को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। बिजली बोर्ड प्रबंधन अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में अब तक 7.5 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। स्मार्ट मीटर केवल बिजली खपत को मापने का एक उपकरण है, ठीक वैसे ही जैसे पुराने सामान्य मीटर होते हैं। इसका बिजली की दरों, टैरिफ या बिलिंग नीति से कोई लेना-देना नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया पर जो भ्रम फैलाया जा रहा है, वह सही जानकारी के अभाव में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किए जाने का परिणाम है।
उपभोक्ता बिजली का उपयोग नहीं करता है तो उसे नियमित रूप से औसत बिल नहीं मिलेगा
बोर्ड प्रबंधन ने बताया कि पुराने मीटरों में कई बार मासिक आधार पर औसत रीडिंग से बिल जारी कर दिए जाते थे, चाहे उपभोक्ता ने बिजली का उपयोग किया हो या नहीं, जबकि स्मार्ट मीटर में वास्तविक खपत के आधार पर ही बिल बनेगा। यदि उपभोक्ता बिजली का उपयोग नहीं करता है तो उसे नियमित रूप से औसत बिल नहीं मिलेगा।
स्मार्ट मीटर का डाटा पहुंचता है डाटा सैंटर
प्रबंधन अधिकारियों ने बताया कि स्मार्ट मीटर में बिजली खपत का डाटा अपने आप एक केंद्रीय डाटा सैंटर तक पहुंच जाता है, जिससे सही बिलिंग, बेहतर ऑनलाइन सेवाएं और उपभोक्ताओं को अधिक सुविधा मिल सकेगी। यह बदलाव केवल मीटर बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनुमान या मैनुअल बिलिंग से हटकर वास्तविक समय रियल टाइम डाटा आधारित प्रणाली की ओर एक बड़ा कदम है।
उपभोक्ता को है संदेह तो दूसरा मीटर लगाने की अनुमति
अधिकारियों ने बताया कि यदि किसी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर की रीडिंग पर संदेह हो तो प्रदेश सरकार ने मौजूदा मीटर के साथ दूसरा स्मार्ट मीटर लगाने की अनुमति भी दी है। इससे उपभोक्ता हर 15 मिनट में अपनी बिजली खपत की जानकारी स्वयं देख सकता है। यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तो उपभोक्ता अपने संबंधित विद्युत उपमंडल कार्यालय से संपर्क कर सकता है।