Edited By Kuldeep, Updated: 26 Mar, 2025 09:46 PM

राज्य सरकार ने नशे पर नकेल कसने के लिए नियमों में कड़े प्रावधान करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश संगठित अपराध (निवारण एवं नियंत्रण) विधेयक, 2025 सदन में पेश किया।
शिमला (कुलदीप): राज्य सरकार ने नशे पर नकेल कसने के लिए नियमों में कड़े प्रावधान करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश संगठित अपराध (निवारण एवं नियंत्रण) विधेयक, 2025 सदन में पेश किया। विधेयक के पारित होने के बाद राज्य में नशे की तस्करी में संलिप्त लोगों को मृत्युदंड से लेकर आजीवन कारावास की सजा भी हो सकती है। साथ ही 10 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान भी कानून में किया गया है। विधेयक में नशे की तस्करी करके अवैध रूप से जुटाई गई संपत्ति को जब्त यानी कुर्क करने का भी प्रावधान है। ऐसी निषिद्ध दवाओं जिनसे से नशे की लत लग सकती है, उनके परिवहन, आपूर्ति तथा इन्हें रखने पर सजा मिलेगी। इसके अलावा अवैध खनन, वन्य जीवों की तस्करी, मानव तस्करी, झूठे दस्तावेजों के साथ कोई काम करना, मानव अंगों की तस्करी, खतरनाक पदार्थों की डंपिंग तथा बौद्धिक वस्तुओं की जालसाजी जैसे अपराध भी कानून के दायरे में आएंगे। सरकार अवैध तरीकों से अर्जित की गई संपत्ति को कुर्क कर सकेगी जिसके लिए 14 दिन का नोटिस देना होगा। अपराधों की प्रवृत्ति के अनुसार सजा 6 माह, 1 वर्ष, 2 वर्ष अथवा 10 वर्ष हो सकती है। विधानसभा में यह विधेयक चर्चा के बाद पारित होगा।
नशे की गिरफ्त में आए लोगों के पुनर्वास संबंधी विधेयक भी पेश, कोष गठित होगा
नशे की गिरफ्त में आए लोगों के पुनर्वास संबंधी विधेयक भी सदन में पेश किया गया। स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डा. धनीराम शांडिल ने हिमाचल प्रदेश मादक पदार्थ एवं नियंत्रित पदार्थ (निवारण, नशामुक्ति और पुनर्वास) विधेयक, 2025 को सदन में पेश किया। विधेयक के सदन से पारित होने से नशे की लत में फंसे लोगों का पुनर्वास हो सकेगा। इससे पुनर्वास केंद्र खोलने की शक्तियां सरकार के पास होंगी। इसके लिए अनुदान, केंद्र, राज्य सरकार व सीएसआर से धन का प्रावधान किया जाएगा। पुनर्वास केंद्रों की स्थापना के लिए एक कोष गठित होगी। इस निधि का नियंत्रक महालेखा परीक्षक ऑडिट करेगा।
अल्प मात्रा में नशीले पदार्थ पकड़े जाने पर सजा का प्रावधान
विधेयक के प्रावधान के अनुसार अल्प मात्रा में नशीले पदार्थों के साथ पकड़े जाने पर 2 से 5 वर्ष की सजा तथा 20 से 50 हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है। अधिक मात्रा में नशीले पदार्थों के साथ पकडे़ जाने पर 5 से 7 वर्ष की सजा तथा 50 हजार से 1 लाख रुपए तक जुर्माना होगा। वाणिज्यिक मात्रा में नशीले पदार्थों के साथ पकड़े जाने पर 10 से 15 वर्ष की कैद व 1 से 2 लाख रुपए तक जुर्माना हो सकता है। किसी भी लोक सेवक के नशीले पदार्थों के साथ पकड़े जाने पर उसे तय से डेढ़ गुना सजा व इतना ही अधिक जुर्माना होगा। इसी तरह 18 वर्ष से कम उम्र के युवाओं के नशीले पदार्थों के साथ पकड़े जाने पर उन्हें भी लोक सेवकों की तर्ज पर ही सजा व जुर्माना देना होगा।