Edited By Swati Sharma, Updated: 04 Mar, 2026 05:13 PM

Shimla News: हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों को लेकर चुनावी बिगुल बजने ही वाला है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 31 मई तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की समय-सीमा तय किए जाने के बाद, प्रदेश सरकार ने युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। राज्य...
Shimla News: हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों को लेकर चुनावी बिगुल बजने ही वाला है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 31 मई तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की समय-सीमा तय किए जाने के बाद, प्रदेश सरकार ने युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। राज्य सरकार ने सभी जिला उपायुक्तों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि 31 मार्च तक पंचायतों का आरक्षण रोस्टर हर हाल में फाइनल कर दिया जाए।
चुनावी रोस्टर का पूरा शेड्यूल
पंचायतीराज विभाग द्वारा जारी समय-सारणी के अनुसार, रोस्टर प्रक्रिया को चरणों में पूरा किया जाएगा:
20 मार्च: सभी जिलों में आरक्षण रोस्टर निर्धारण का कार्य शुरू होगा।
30 मार्च: प्रक्रिया को अंतिम रूप देकर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
31 मार्च: उपायुक्त आधिकारिक तौर पर अपने-अपने जिलों का रोस्टर सार्वजनिक करेंगे।
84 नई पंचायतों का बदलेगा समीकरण
प्रदेश में 84 नई पंचायतों के गठन और कई मौजूदा पंचायतों की सीमाओं में बदलाव (पुनर्सीमांकन) के कारण इस बार आरक्षण का निर्धारण नए सिरे से होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आरक्षण तय करने के लिए अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और महिला वर्ग की जनसंख्या के नवीनतम आंकड़ों को ही आधार बनाया जाएगा। जैसे ही 31 मार्च को रोस्टर की स्थिति साफ होगी, राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अप्रैल के मध्य तक चुनावी अधिसूचना जारी हो सकती है। हिमाचल प्रदेश के पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा, "हमने सभी जिलों को 31 मार्च तक आरक्षण रोस्टर फाइनल करने के निर्देश दे दिए हैं। नई पंचायतों के गठन के बाद यह प्रक्रिया बहुत महत्वपूर्ण है और इसे पूरी पारदर्शिता के साथ समय सीमा के भीतर पूरा किया जाएगा।"