Himachal: BJP विधायक हंसराज की बढ़ीं मुश्किलें! पोक्सो एक्ट मामले में जमानत के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची पीड़िता, नोटिस जारी

Edited By Swati Sharma, Updated: 25 Feb, 2026 01:01 PM

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिला के चुराह से भाजपा विधायक हंसराज के खिलाफ दर्ज पोक्सो (POCSO) एक्ट मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। पीड़िता ने चंबा की निचली अदालत द्वारा विधायक को दी गई नियमित जमानत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस पर...

Shimla News: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिला के चुराह से भाजपा विधायक हंसराज के खिलाफ दर्ज पोक्सो (POCSO) एक्ट मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। पीड़िता ने चंबा की निचली अदालत द्वारा विधायक को दी गई नियमित जमानत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने विधायक हंसराज सहित सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया 4 हफ्ते का समय

न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की एकल पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को अगले चार सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। पीड़िता की ओर से अधिवक्ता बीएल सोनी और नितिन सोनी ने दलीलें पेश कीं। अदालत ने फिलहाल मामले के मेरिट (गुण-दोष) पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सरकार और पुलिस प्रशासन से जवाब मांगा है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला साल 2024 से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। अगस्त 2024 में पीड़िता ने विधायक पर अश्लील चैट करने और दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर 16 अगस्त 2024 को चंबा महिला थाने में FIR दर्ज हुई। शुरुआत में कोर्ट में बयान देने के बाद पीड़िता अचानक अपने आरोपों से पलट गई थी। उसने सोशल मीडिया पर लाइव आकर इसे 'गलतफहमी' करार दिया था। अक्टूबर 2025 में फिर विवाद उठा। एक साल की चुप्पी के बाद पीड़िता ने वीडियो जारी कर रोते हुए आरोप लगाया कि उसका परिवार विधायक की वजह से बर्बाद हो गया है और उसे जान का खतरा है।

नवंबर 2025 में पीड़िता के पिता ने सनसनीखेज खुलासा किया कि विधायक के करीबियों ने उनकी बेटी का अपहरण किया था और दबाव डालकर बयान बदलवाए थे। भाजपा विधायक हंसराज को 27 नवंबर 2025 को चंबा कोर्ट से नियमित जमानत मिली थी। पीड़िता का तर्क है कि यह जमानत गलत आधार पर दी गई है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। अब हाईकोर्ट यह तय करेगा कि विधायक की जमानत याचिका को एडमिशन मिलना चाहिए या नहीं। प्रशासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता जितेंद्र शर्मा ने पक्ष रखा। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई राज्य सरकार का जवाब आने के बाद होगी।

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