हिमाचल कांग्रेस में नेतृत्व संकट! अध्यक्ष की ताजपोशी के ढाई महीने बाद भी नहीं बना संगठन; बिना टीम के चुनाव मैदान में उतरेगी पार्टी?

Edited By Swati Sharma, Updated: 07 Feb, 2026 01:34 PM

organizational crisis in himachal congress due to high command indifference

Shimla News: हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को लेकर संकट लगातार गहराता जा रहा है और अब यह सियासी हलकों में चर्चा का बड़ा विषय बन चुका है। प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति में जहां पार्टी को करीब एक साल का समय लग गया, वहीं अध्यक्ष की...

Shimla News: हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को लेकर संकट लगातार गहराता जा रहा है और अब यह सियासी हलकों में चर्चा का बड़ा विषय बन चुका है। प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति में जहां पार्टी को करीब एक साल का समय लग गया, वहीं अध्यक्ष की ताजपोशी के ढाई महीने बाद भी प्रदेश संगठन का गठन नहीं हो सका है। हालात ऐसे हैं कि कांग्रेस के भीतर ही नेता संगठन के गठन को लेकर उम्मीद खोते नजर आ रहे हैं, जिससे जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं में गहरी मायूसी देखी जा रही है।

भंग पड़ी हैं जिला और ब्लॉक इकाइयां

गौरतलब है कि 6 नवंबर 2024 को हाईकमान ने एक बड़ा फैसला लेते हुए हिमाचल कांग्रेस की प्रदेश, जिला और ब्लॉक स्तर की सभी कमेटियों को भंग कर दिया था। तब दावा किया गया था कि संगठन में 'नई जान' फूंकने के लिए जल्द ही नई नियुक्तियां होंगी। लेकिन 15 महीने का लंबा इंतजार अब कार्यकर्ताओं के सब्र का बांध तोड़ रहा है।

पंगु होता संगठन और 'असहाय' नेतृत्व

पार्टी के भीतर बढ़ती हताशा का अंदाजा प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार के हालिया बयान से लगाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपनी ओर से पूरी रिपोर्ट हाईकमान को सौंप चुके हैं और अब गेंद दिल्ली के पाले में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अध्यक्ष का यह बयान उनकी बेबसी को दर्शाता है, जिससे साफ है कि निर्णय प्रक्रिया में स्थानीय नेतृत्व की पकड़ ढीली पड़ चुकी है।

संगठन की मौजूदा स्थिति पर एक नजर:

कुल पद: प्रदेश, जिला और ब्लॉक स्तर की कार्यकारिणी शून्य।
अधूरे जिले: 11 जिलों में नियुक्तियों के दावे के बावजूद शिमला ग्रामीण और किन्नौर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र अब भी अध्यक्ष विहीन हैं।
कार्यकर्ताओं का दर्द: जमीनी स्तर पर वर्कर्स खुद को 'नेतृत्व विहीन' और 'असहाय' महसूस कर रहे हैं।

निकाय चुनावों की दहलीज पर खड़ी कांग्रेस

यह संकट ऐसे समय में गहराया है, जब प्रदेश में पंचायती राज और नगर निगम चुनाव सिर पर हैं। नगर निगम चुनाव पार्टी सिंबल पर लड़े जाते हैं, जिसके लिए मजबूत संगठन अनिवार्य है। कार्यकर्ताओं का सवाल है कि बिना सेनापति और बिना फौज के कांग्रेस चुनावी रण में भाजपा का मुकाबला कैसे करेगी? मंत्री चंद्र कुमार के अलावा पूर्व अध्यक्ष प्रतिभा सिंह भी जल्द गठन की वकालत कर चुकी हैं, लेकिन दिल्ली की बैठकों का दौर बेनतीजा ही रहा है। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू और डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री की बार-बार की दिल्ली दौड़ भी अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं दे पाई है।

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