Edited By Kuldeep, Updated: 19 Jan, 2026 10:55 PM

न्यूजीलैंड से सेब आयात पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने समेत 14 सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार को हिमाचल प्रदेश किसान मंच और सेब उत्पादक संघ ने राज्य सचिवालय का घेराव किया।
शिमला (अम्बादत) : न्यूजीलैंड से सेब आयात पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने समेत 14 सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार को हिमाचल प्रदेश किसान मंच और सेब उत्पादक संघ ने राज्य सचिवालय का घेराव किया। कैबिनेट बैठक के दौरान हुए इस प्रदर्शन में सैंकड़ों किसान और बागवान शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सचिवालय के बाहर धरना दिया। यह धरना-प्रदर्शन टॉलैंड से रैली निकालकर शुरू हुआ। उसके बाद यह रैली सचिवालय तक निकाली गई। इस दौरान काफी समय तक छोटा शिमला में जाम लगा रहा, जिसके चलते लोगों को परेशानी हुई। प्रदर्शनकारियों ने न्यूजीलैंड से सेब आयात पर ड्यूटी घटाने के फैसले को प्रदेश के सेब उत्पादकों के हितों के खिलाफ बताया।
किसानों का कहना था कि इससे हिमाचल के सेब उत्पादकों को भारी नुक्सान उठाना पड़ेगा। इसके साथ ही एफआरए को प्रभावी ढंग से लागू करने समेत 14 मांगों को लेकर किसान सचिवालय पहुंचे थे। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को 14 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा और कानून बनाने की मांग की। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि किसानों व बागवानों के मुद्दो् को विधानसभा में उठाया जाएगा। वहीं प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी है यदि मांग न मानी तो विधानसभा का घेराव किया जाएगा। वहीं केंद्र सरकार का दिल्ली में जाकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। हिमाचल किसान सभा के अध्यक्ष कुलदीप तंवर ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार देश और हिमाचल प्रदेश के गरीब किसानों की परवाह नहीं कर रही हैं। इस मौके पर पूर्व सीपीआईएम विधायक राकेश सिंघा ने स्पष्ट किया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। माकपा नेता संजय चौहान ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की खुली अवहेलना का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेशों के बावजूद किसानों को भूमि देने के लिए कोई ठोस नीति नही बनाई गई।
एमआईएस बंद, स्मार्ट मीटर और एसजेवीएनएल पर भी उठे सवाल
राकेश सिंघा ने आरोप लगाया कि प्रदेश में दूध का समर्थन मूल्य घोषित तो किया गया लेकिन उसका लाभ किसानों तक नहीं पहुंच रहा। उन्होंने एसजेवीएनएल को प्रदेश का दूसरा लुटेरा बताते हुए स्मार्ट मीटर बंद करने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि किसान बिजली के बढ़ते बिल चुकाने में असमर्थ हैं, साथ ही एमआईएस के तहत मिलने वाले 1,500 करोड़ रुपए बंद होने के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों को जिम्मेदार ठहराया।
दुग्ध उत्पादकों की पेमैंट पहली तारीख को सुनिश्चित करे सरकार
संजय चौहान ने साफ किया कि अगर सरकार ने 19 जनवरी के बाद भी आंखें मूंदे रखीं तो आंदोलन सिर्फ सचिवालय तक सीमित नहीं रहेगा। हिमाचल के गांव-गांव से उठने वाली यह आवाज सत्ता के गलियारों तक गूंजेगी। उन्होंने दुग्ध उत्पादकों को हर महीने का भुगतान पहली तारीख को सुनिश्चित करने की भी मांग की। उन्होंने बताया कि किसान विरोधी केंद्र सरकार ने मंडी मध्यस्थता योजना का बजट 2023 में जीरो कर दिया है। वहीं राज्य सरकार भी बागवानों से खरीदे सेब का भुगतान नहीं कर रही है। इस मुद्दे को भी आज रैली के माध्यम से उठाया जा रहा है।
संजौली से छोटा शिमला यातायात रहा बंद, लगा लंबा जाम
सचिवालय प्रदर्शन के चलते संजौली से छोटा शिमला तक यातायात पूरी तरह से बंद रहा। इस दौरान हजारों की संख्या में वाहनों के पहिए सड़क पर जाम हो गए। यह जाम शाम 5 बजे के बाद खुला, जिसके चलते दिन भर वाहन टॉलैंड से पंथाघाटी होते हुए ढली व ओल्ड बस स्टैंड से लक्कड़ बाजार होते हुए संजौली निकले। इस दौरान इन सड़कों पर भी दिन भर जाम लगा रहा और लोग परेशान होते रहे।