Edited By Vijay, Updated: 10 Jan, 2026 07:50 PM

हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य को गंभीर वित्तीय संकट से बाहर निकालने के लिए विशेष पैकेज जारी करने की मांग की है। इसके अलावा केंद्रीय योजनाओं में प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग भी की है।
शिमला (कुलदीप): हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य को गंभीर वित्तीय संकट से बाहर निकालने के लिए विशेष पैकेज जारी करने की मांग की है। इसके अलावा केंद्रीय योजनाओं में प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग भी की है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ नई दिल्ली में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों के साथ बजट पूर्व परामर्श (प्री-बजट) बैठक में तकनीकी शिक्षा एवं टीसीपी मंत्री राजेश धर्माणी ने यह मामला उठाया।
राजेश धर्माणी ने प्रदेश में मानसून की भारी वर्षा के कारण आई प्राकृतिक आपदा की भरपाई के लिए वित्तीय मदद उपलब्ध करवाने का आग्रह किया है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से घोषित 1500 करोड़ रुपए का विशेष राहत पैकेज भी शामिल है। उनका कहना था कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों को राशि आबंटित करते समय मैदानी क्षेत्रों जैसे मापदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि पहाड़ी राज्यों में सड़क निर्माण से लेकर अन्य प्रोजैक्टों की निर्माण लागत मैदानी क्षेत्रों से कई गुना अधिक आती है।
राजेश धर्माणी ने प्रदेश को मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) राशि को बढ़ाने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021-22 में हिमाचल प्रदेश को 10257 करोड़ रुपए राजस्व घाटा अनुदान मिलता था, जो वर्ष 2025-26 में घटाकर 3,257 करोड़ रुपए रह गया है। उन्होंने बीबीएमबी परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश की 12 फीसदी हिस्सेदारी एवं बकाया एरियर के करीब 4500 करोड़ रुपए शीघ्र उपलब्ध करवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि जून, 2022 से जीएसटी मुआवजा बंद होने से राज्य को हर वर्ष 2600 से 2700 करोड़ रुपए का सीधे नुक्सान हुआ, जिसकी भरपाई की जानी चाहिए।
राजेश धर्माणी ने प्रदेश के कर्मचारियों को पुरानी पैंशन (ओपीएस) देने की एवज में केंद्र सरकार की तरफ से 1770 करोड़ रुपए की अतिरिक्त उधारी (एडिशनल बोरोइंग) को बहाल करने की भी मांग की। उन्होंने रेल, फोरलेन, एनएच व रोपवे निर्माण सहित अन्य प्रोजैक्टों में प्रदेश को उदार वित्तीय मदद उपलब्ध करवाने का आग्रह किया। उन्होंने भानुपल्ली-मनाली-लेह और चंडीगढ़-बद्दी रेल लाइन निर्माण जैसे प्रोजैक्टों के भूमि अधिग्रहण का खर्च केंद्र सरकार की तरफ से वहन करने की मांग की।
राजेश धर्माणी ने 5000 कराेड़ रुपए की सेब बागवानी को राहत देने के लिए सेब पर आयात शुल्क को बढ़ाकर 100 फीसदी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बाजार में आयातित सेब आने से हिमाचल के सेब के मूल्य में तेजी से गिरावट आई है, जिससे राज्य के बागवानों को राजस्व का घाटा हो रहा है। ऐसे में आयात शुल्क में बढ़ौतरी करने के साथ ही सेब को ओपन जनरल लाइसैंस (ओजीएल) की फल एवं अन्य माल सूची से बाहर रखा जाना चाहिए।