Himachal: मेडिकल काॅलेजों व सुपर स्पैशलिटी संस्थानों का हाेगा कायाकल्प, सरकार ने पहले चरण में स्वीकृत किए ₹1617 करोड़

Edited By Vijay, Updated: 15 Feb, 2026 07:29 PM

medical colleges and super specialty institutes will be rejuvenated

अब प्रदेश के मेडिकल काॅलेजों व सुपर स्पैशलिटी संस्थानों की स्वास्थ्य व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। राज्य में सुलभ एवं उच्च गुणवत्तापूर्ण वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 3000 करोड़ की व्यापक स्वास्थ्य आधुनिकीकरण पहल...

शिमला (संतोष): अब प्रदेश के मेडिकल काॅलेजों व सुपर स्पैशलिटी संस्थानों की स्वास्थ्य व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। राज्य में सुलभ एवं उच्च गुणवत्तापूर्ण वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 3000 करोड़ की व्यापक स्वास्थ्य आधुनिकीकरण पहल के प्रथम चरण में 1617 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। इस निवेश के तहत सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों, सुपर स्पैशलिटी केंद्रों और आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों के बुनियादी ढांचे को उन्नत किया जाएगा। यह परियोजना 1 अप्रैल, 2026 से 30 अप्रैल, 2031 तक लागू की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत संस्थानों को अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं, सिमुलेशन-आधारित मेडिकल प्रशिक्षण प्रणालियों, एआई-सक्षम हैंडहैल्ड एक्स-रे उपकरणों तथा एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म से सुसज्जित किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य विशेषज्ञ उपचार तक समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करना, रैफरल से संबंधित लागत को कम करना, रोगियों के स्वास्थ्य में सुधार करना तथा दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को सुदृढ़ करना है।

पहले चरण में भौतिक अवसंरचना को बनाया जाएगा मजबूत
परियोजना का पहला चरण भौतिक अवसंरचना को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है। इसके अंतर्गत मेडिकल काॅलेजों में नए भवनों का निर्माण, नवीनीकरण और शैक्षणिक ब्लॉकों, बाह्य एवं आंतरिक रोगी सुविधाओं का उन्नयन किया जाएगा। उच्च स्तरीय सिमुलेशन केंद्र, एआर/वीआर आधारित प्रशिक्षण सुविधाएं, डिजिटल पुस्तकालय और ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म से एकीकृत स्किल लैब स्थापित की जाएंगी। एमआरआई, सीटी स्कैनर, डिजिटल रैडियोलॉजी सिस्टम और मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक प्रयोगशालाओं जैसे उन्नत इमेजिंग और जांच उपकरण स्थापित किए जाएंगे। पीएसीएस, एलआईएमएस, टैली मैडीसिन और लर्निंग मैनेजमैंट सिस्टम (एलएमएस) सहित डिजिटल प्लेटफॉर्म को एबीडीएम मानकों के अनुरूप इंटरऑप्रेबल डेटा विनिमय के लिए एकीकृत किया जाएगा।

दूसरे चरण में संस्थानों को बनाया जाएगा सुदृढ़
दूसरे चरण में आईजीएमसी शिमला, सुपर स्पैशलिटी अस्पताल चमियाणा और मेडिकल काॅलेज हमीरपुर में तृतीयक उपचार केंद्रों को और सुदृढ़ किया जाएगा। रीनल और बोन मैरो ट्रांसप्लांट, न्यूरोसर्जरी, कार्डियोथोरेसिक सर्जरी, उन्नत एंडोस्कोपिक प्रक्रियाएं, बाल चिकित्सा सेवाएं तथा रोबोटिक-सहायता प्राप्त सर्जरी जैसी सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। संस्थानों को ओ-आर्म 3डी इमेजिंग, न्यूरो-नैविगेशन सिस्टम, रोबोटिक सर्जरी प्लेटफॉर्म और एकीकृत क्रिटिकल केयर मॉनीटरिंग सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया जाएगा। एक उन्नत बाल चिकित्सा देखभाल एवं नवाचार केंद्र भी स्थापित किया जाएगा, जो क्रिटिकल, सर्जिकल और टैली-सक्षम बाल चिकित्सा सेवाओं को एकीकृत करेगा।

तीसरे चरण में आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों पर रहेगा बल
परियोजना के तीसरे चरण में आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों को सुदृढ़ किया जाएगा, जिसके तहत इन संस्थानों को सीटी स्कैनर, मोबाइल एक्स-रे यूनिट, अल्ट्रासाऊंड मशीनें, लैप्रोस्कोपिक सिस्टम और नेत्र शल्य चिकित्सा इकाइयों सहित आधुनिक डायग्नोस्टिक और सर्जिकल सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। टैलीमैडीसिन सेवाओं और डिजिटल रैफरल नैटवर्क का विस्तार कर जिला अस्पतालों को तृतीयक और सुपर स्पैशलिटी केंद्रों से निर्बाध रूप से जोड़ा जाएगा।

लोगों को विशेषज्ञ व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध : सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को विशेषज्ञ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि राज्य में स्वास्थ्य संस्थानों के आधुनिकीकरण के लिए कई पहलें की जा चुकी हैं। सुपर स्पैशलिटी अस्पताल चमियाणा और मेडिकल काॅलेज टांडा में रोबोटिक सर्जरी सुविधाएं शुरू की गई हैं और जल्द ही अन्य मेडिकल काॅलेजों में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आने वाले समय में स्वास्थ्य संस्थानों को अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों से सुसज्जित करने के लिए 3000 करोड़ रुपए का निवेश करने की योजना बना रही है।

प्रतिवर्ष 9.5 लाख मरीज नहीं जाएंगे बाहर
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रतिवर्ष 9.5 लाख मरीज उपचार के लिए हिमाचल से बाहर जाते हैं, जिससे राज्य की जीडीपी को लगभग 1350 करोड़ रुपए का आर्थिक नुक्सान होता है। यदि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं राज्य के भीतर उपलब्ध करवाई जाएं, तो अनुमान है कि प्रतिवर्ष लगभग 550 करोड़ रुपए की जीडीपी की बचत की जा सकती है, साथ ही मरीजों का बहुमूल्य समय भी बचेगा।

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