Mandi: गोहर में पीलिया का प्रकाेप...अब तक 117 लोग प्रभावित, जल शक्ति विभाग ने उठाया ये बड़ा कदम

Edited By Vijay, Updated: 14 Feb, 2026 12:50 PM

jaundice outbreak in gohar jal shakti department took this big step

मंडी जिला के उपमंडल गोहर में पीलिया रोग के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए जल शक्ति विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। जल शक्ति विभाग के अधीक्षण अभियंता (सुंदरनगर) आरके सैनी ने प्रैस वार्ता कर बताया कि....

गोहर (ख्यालीराम): मंडी जिला के उपमंडल गोहर में पीलिया रोग के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए जल शक्ति विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। जल शक्ति विभाग के अधीक्षण अभियंता (सुंदरनगर) आरके सैनी ने प्रैस वार्ता कर बताया कि क्षेत्र में अब तक पीलिया से 117 लोग प्रभावित हो चुके हैं, जिनमें से 79 लोग स्वस्थ हो चुके हैं तथा शेष मरीजों का इलाज जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बीमारी के फैलने का मुख्य कारण दूषित जल स्रोत हैं, जिनकी जांच में कई स्तरों पर लापरवाही और गंदगी पाई गई है। आरके सैनी ने बताया कि फील्ड अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं कि वे सभी जल स्रोतों का नियमित रखरखाव सुनिश्चित करें। वाटर गार्डों को ब्लीचिंग पाऊडर की सही मात्रा मिलाने और अन्य मानकों के प्रति विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि उपमंडल में तैनात एसडीओ, जेई और अन्य फील्ड अधिकारी किसी भी स्थिति में अपना हैडक्वार्टर नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आदेशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस मौके पर अधिशासी अभियंता कृष्ण कुमार शर्मा, एसडीओ दत्त राम ठाकुर, जेई रूप सिंह ठाकुर व जेई चैलचौक सैक्शन अविनाश ठाकुर उपस्थित रहे।

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अब तक लिए जा चुके हैं 258 सैंपल
अधीक्षण अभियंता ने बताया कि विभाग ने गोहर उपमंडल के सभी जल स्रोतों को साफ करवाने के साथ-साथ पानी के नमूनों की जांच की प्रक्रिया तेज कर दी है। अब तक कुल 258 सैंपल लिए जा चुके हैं, जिनमें से 20 जिला प्रयोगशाला भेजे गए, जबकि अधिकांश सैंपलों की जांच उपमंडलीय स्तर पर स्थित बग्गी लैब में की गई। 84 मरीज ऐसे पाए गए हैं, जो बावड़ियों के आसपास रहते हैं।

इन बावड़ियों के पानी में पाया गया बैक्टीरिया
जिन बावड़ियों में बैक्टीरिया पाया गया है, उनमें डल, कलश, अवाहधार व एक दीवान चंद के घर के समीप शामिल है। इसके साथ गणई में एक बोरवैल और एक बावड़ी अभिलाषी विश्वविद्यालय के साथ पाई गई है। इसके अलावा ऐसे सभी स्रोतों पर विभाग ने नोटिस चस्पां कर दिए हैं, जिनमें साफ लिखा है कि यह पानी पीने योग्य नहीं है। सबसे गंभीर मामला बाढू डुंगराई उठाऊ पेयजल परियोजना का सामने आया, जहां स्रोत का सैंपल फेल होने के साथ-साथ उसमें गंदे पानी के रिसाव की पुष्टि हुई। इसके तुरंत बाद विभाग ने यहां से पानी की आपूर्ति बंद कर दी और प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक परियोजना से जलापूर्ति शुरू कर दी गई है।

प्रदूषण फैलाने पर 34 को जारी किए नोटिस
प्रकोप की जड़ तक पहुंचने के लिए की गई गहन जांच में सामने आया कि ज्यूणी खड्ड और आसपास के जल स्रोतों में कई लोग अपने घरों का गंदा पानी सीधे छोड़ रहे थे, जिससे पूरा जल तंत्र प्रदूषित हो रहा था। विभाग ने इस गंभीर लापरवाही पर संज्ञान लेते हुए ऐसे 34 लोगों को नोटिस जारी कर दिए हैं और उन्हें तुरंत प्रदूषण फैलाने का काम बंद करने के निर्देश दिए हैं।

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