Iran Israel War: अपनों की सलामती के लिए वीडियो कॉल का सहारा, जानें हिमाचल के फंसे युवा क्या बोले

Edited By Jyoti M, Updated: 06 Mar, 2026 10:48 AM

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ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच युद्ध के बादलों ने सात समंदर पार बैठे हिमाचली परिवारों की रातों की नींद उड़ा दी है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव का खौफ अब खाड़ी देशों में रोजी-रोटी कमाने गए पहाड़ी गबरुओं के चेहरों पर साफ दिखने लगा...

हिमाचल डेस्क। ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच युद्ध के बादलों ने सात समंदर पार बैठे हिमाचली परिवारों की रातों की नींद उड़ा दी है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव का खौफ अब खाड़ी देशों में रोजी-रोटी कमाने गए पहाड़ी गबरुओं के चेहरों पर साफ दिखने लगा है। कहीं सन्नाटा और धमाकों का डर है, तो कहीं अपनों को दिलासा देने की जद्दोजहद।

बहरीन में मिसाइलों का शोर 

युद्ध की सबसे भीषण मार बहरीन के सीतरा शहर में महसूस की जा रही है, जहां मंडी जिले के लडभड़ोल (मेहड़ गांव) के रविंद्र सिंह राणा फंसे हुए हैं। रविंद्र ने बताया कि वहां आसमान से ड्रोन और मिसाइलों की बारिश हो रही है, जिससे पूरा शहर थर्रा उठा है। सड़कें सूनी हैं और बाजार पूरी तरह बंद हैं।

ऐसी खौफनाक स्थिति में रविंद्र और उनके साथ फंसे करीब 175 भारतीय युवाओं का संबल उनके कमरे में लगी बाबा बालक नाथ जी की तस्वीर है। रविंद्र का कहना है कि उन्हें 'पौणाहारी' पर पूरा भरोसा है कि वे सबको सुरक्षित घर पहुंचाएंगे। हालांकि, एकमात्र एयरपोर्ट बंद होने के कारण घर वापसी का रास्ता फिलहाल बंद है। उनकी पत्नी बिंदू और मां विमला देवी ने भारत सरकार से गुहार लगाई है कि वहां फंसे हिमाचली युवाओं को जल्द रेस्क्यू किया जाए।

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वीडियो कॉल से बुझाई माता-पिता की चिंता की आग

सऊदी अरब के जेद्दा एयरपोर्ट पर सुरक्षा अधिकारी के रूप में तैनात चंबा (सिहुंता) के रोहित खान के लिए स्थिति थोड़ी अलग है। हालांकि वे युद्ध की खबरों से डरे हुए हैं, लेकिन राहत की बात यह है कि जेद्दा में फिलहाल जनजीवन सामान्य है।

जब रोहित के पिता मुहम्मद हनीफ और माता राज बेगम टीवी पर युद्ध की खबरें देखकर घबरा गए, तो रोहित ने तकनीक का सहारा लिया। उन्होंने व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए अपने घर और आसपास का माहौल दिखाया ताकि माता-पिता को यकीन हो सके कि उनका बेटा सुरक्षित है। रोहित का कहना है कि बहरीन जैसी जगहों से वे काफी दूर हैं, इसलिए यहां अभी काम सुचारू रूप से चल रहा है।

कांगड़ा के नूरपुर निवासी पीरबक्श दुबई से करीब 50 किलोमीटर दूर शारजाह के एक वेयरहाउस में कार्यरत हैं। उन्होंने फोन पर अपने परिजनों को बताया कि वहां अभी तनाव का कोई सीधा असर नहीं देखा जा रहा है। लोग अपनी रोजमर्रा की ड्यूटी पर जा रहे हैं और माहौल शांत है। बेटे से लंबी बात होने के बाद उनकी मां मासो बीबी के मन को तसल्ली मिली है।

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