Edited By Jyoti M, Updated: 02 Mar, 2026 12:24 PM

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय प्रवासियों, विशेषकर हिमाचल प्रदेश के परिवारों की रातों की नींद उड़ा दी है। ईरान-इस्राइल और अमेरिका के बीच गहराते युद्ध के संकट ने उन हजारों परिवारों को चिंता में डाल दिया है जिनके सदस्य...
हिमाचल डेस्क। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय प्रवासियों, विशेषकर हिमाचल प्रदेश के परिवारों की रातों की नींद उड़ा दी है। ईरान-इस्राइल और अमेरिका के बीच गहराते युद्ध के संकट ने उन हजारों परिवारों को चिंता में डाल दिया है जिनके सदस्य रोजगार के लिए खाड़ी देशों में बसे हैं।
हिमाचल सरकार अलर्ट पर
हिमाचल प्रदेश के लगभग 45,000 लोग दुबई, सऊदी अरब, कतर, कुवैत और ओमान में कार्यरत हैं। राज्य के श्रम एवं रोजगार मंत्री हर्षवर्धन सिंह चौहान ने विभाग को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे विदेशों में रह रहे युवाओं और उनके परिजनों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखें। यदि स्थिति बिगड़ती है और वहां से वापसी की मांग उठती है, तो राज्य सरकार केंद्र के साथ मिलकर प्रवासियों को सुरक्षित स्वदेश लाने के लिए 'स्पेशल फ्लाइट्स' और अन्य जरूरी कदम उठाएगी।
खाड़ी देशों से डराने वाली खबरें
विभिन्न देशों में फंसे हिमाचलियों ने सोशल मीडिया और कॉल के जरिए वहां के चिंताजनक हालात साझा किए हैं।
बहरीन: सिरमौर के रहने वाले कपिल नेगी ने बताया कि उनके कार्यस्थल के पास स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मिसाइलें गिरने से वहां काफी दहशत है।
कतर: हमीरपुर के पंकज और उनकी पत्नी रुचि ने परिजनों को बताया कि दोहा में प्रशासन ने लोगों को घरों के भीतर रहने की सख्त हिदायत दी है।
दुबई और ओमान: दुबई में सिविल इंजीनियर के रूप में कार्यरत सतीश कुमार (ऊना) ने देर रात बजते इमरजेंसी सायरन और धमाकों की आवाज से बने तनावपूर्ण माहौल का जिक्र किया है।
पर्यटन और उड़ानों पर असर
युद्ध के कारण न केवल भारतीय वहां फंसे हैं, बल्कि हिमाचल आए विदेशी पर्यटक भी अपने देश नहीं लौट पा रहे हैं। कांगड़ा के गगल एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के अनिश्चित कार्यक्रम के चलते इस्राइली नागरिकों को वापस जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, दिल्ली और कांगड़ा के बीच घरेलू उड़ानें फिलहाल सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं।
हिमाचल के परिवारों ने सरकार से मांग की है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए ताकि संकट के समय में वे अपने अपनों से संपर्क साध सकें और उन्हें सुरक्षित वापस लाया जा सके।