Kangra: मंगवाल बीट के जंगलों में हरे-भरे पेड़ाें पर बरपा वन माफिया का कहर, वन विभाग को भनक तक नहीं!

Edited By Vijay, Updated: 03 Feb, 2026 07:29 PM

illegal felling of lush green trees in forests

इंदौरा वन रेंज के तहत आने वाली मंगवाल बीट में वन माफिया के हौसले बुलंद हैं। यहां के जंगलों में बड़े पैमाने पर हरे पेड़ों के अवैध कटान का एक गंभीर मामला सामने आया है।

रैहन (दुर्गेश कटोच): इंदौरा वन रेंज के तहत आने वाली मंगवाल बीट में वन माफिया के हौसले बुलंद हैं। यहां के जंगलों में बड़े पैमाने पर हरे पेड़ों के अवैध कटान का एक गंभीर मामला सामने आया है। वन विभाग की नाक के नीचे चल रहे इस खेल में अब तक 50 से 100 बेशकीमती हरे पेड़ों की बलि दी जा चुकी है। यह सिलसिला पिछले करीब एक महीने से लगातार जारी है, लेकिन वन विभाग कुंभकर्णीय नींद सोया हुआ है।

मीडिया को देखते ही भागे लकड़ी तस्कर
मामले की गंभीरता तब और स्पष्ट हो गई जब पंजाब केसरी की टीम कवरेज के लिए मौके पर पहुंची। जंगल में लकड़ी काट रहे कथित तस्कर मीडिया को देखते ही अपना सामान छोड़कर मौके से फरार हो गए। तस्करों का भागना इस बात की पुष्टि करता है कि वहां अवैध गतिविधियां जोरों पर थीं।

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अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास
हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े पैमाने पर हो रहे कटान की भनक स्थानीय वन रक्षकों को नहीं लगी। जब इस संबंध में मंगवाल ब्लॉक के अधिकारी रणधीर कुमार से बात की गई तो उन्होंने रटा-रटाया जवाब देते हुए कहा कि उन्हें इस कटान की कोई जानकारी ही नहीं थी। वहीं, मामले की सूचना मिलने पर नूरपुर वन मंडल अधिकारी (डीएफओ) संदीप कोहली हरकत में आए। उन्होंने तुरंत विभाग के अन्य अधिकारियों को मौके पर जाकर जांच करने के कड़े आदेश दिए हैं।

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सिस्टम पर उठते सवाल
जंगल से 50 से 100 पेड़ों का कटना कोई एक दिन का काम नहीं है। यह घटना वन विभाग की निगरानी व्यवस्था और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। लोगों का कहना है कि बिना विभागीय मिलीभगत या घोर लापरवाही के इतना बड़ा कटान संभव नहीं है। अब देखना यह होगा कि डीएफओ के आदेश के बाद जांच का चाबुक दोषियों पर चलता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।

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