IGST रिपोर्ट में खुलासा: हिमाचल की आबोहवा बिगाड़ रही हैं यह गैसें, जानें कैसे बचेगा हिमालय?

Edited By Jyoti M, Updated: 25 Feb, 2026 10:37 AM

himachal s climate is deteriorating due to methane and black carbon

हिमाचल प्रदेश, जिसे हम अक्सर बर्फीली चोटियों और शुद्ध हवा का घर मानते हैं, इस समय एक गंभीर 'क्लाइमेट इमरजेंसी' की चपेट में है। आमतौर पर हम ग्लोबल वार्मिंग के लिए केवल कार्बन डाइऑक्साइड को दोषी मानते हैं, लेकिन हालिया वैज्ञानिक शोध ने एक चौंकाने वाला...

हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश, जिसे हम अक्सर बर्फीली चोटियों और शुद्ध हवा का घर मानते हैं, इस समय एक गंभीर 'क्लाइमेट इमरजेंसी' की चपेट में है। आमतौर पर हम ग्लोबल वार्मिंग के लिए केवल कार्बन डाइऑक्साइड को दोषी मानते हैं, लेकिन हालिया वैज्ञानिक शोध ने एक चौंकाने वाला सच सामने रखा है। राज्य की आबोहवा को खराब करने में मीथेन और ब्लैक कार्बन जैसे सूक्ष्म तत्व कहीं अधिक खतरनाक भूमिका निभा रहे हैं।

संकट का खुलासा: आईजीएसडी की रिपोर्ट

मंगलवार को शिमला स्थित राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्था 'इंस्टीट्यूट फॉर गवर्नेंस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट' (IGSD) की एक विशेष रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट का सार यह है कि अगर हमने अगले दस वर्षों के भीतर ठोस रणनीति नहीं बनाई, तो देवभूमि के पर्यावरण को होने वाली क्षति अपूरणीय होगी।

प्रदूषण के मुख्य स्रोत:

बढ़ते वाहनों का काफिला और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला उत्सर्जन। मवेशियों के पाचन और पारंपरिक खेती के तरीके। कचरे के ढेर से निकलने वाली जहरीली गैसें। जेनरेटरों की बढ़ती संख्या, जो सीधे तौर पर ब्लैक कार्बन बढ़ा रहे हैं।

भविष्य का रोडमैप: कैसे बचेगा हिमालय?

पर्यावरण विभाग के सचिव सुशील कुमार सिंगला और वैज्ञानिक डॉ. निमिष सिंह ने इस चुनौती से निपटने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ बदलावों से हम बड़े नतीजे हासिल कर सकते हैं।

चारे की गुणवत्ता बेहतर करके और मवेशियों की नस्ल सुधार कर मीथेन उत्सर्जन में 27% की कमी लाई जा सकती है। पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों को सड़कों से हटाकर और ई-वाहनों को बढ़ावा देकर 2047 तक प्रदूषकों पर लगाम लगाने का लक्ष्य है।

लैंडफिल साइट्स के वैज्ञानिक प्रबंधन और कंपोस्टिंग के जरिए मीथेन को 50% तक घटाना संभव है। रसोई में एलपीजी और क्लीन कुकिंग को अपनाकर ब्लैक कार्बन के स्तर को कम किया जाएगा।

मुख्यमंत्री की चेतावनी: प्रकृति दे रही है दस्तक

मुख्यमंत्री सुक्खू ने भावुक और गंभीर लहजे में कहा कि हिमाचल केवल एक नक्शा नहीं, बल्कि "हिमालय की आत्मा" है। उन्होंने 2023 की त्रासदी का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे बादल फटने और ग्लेशियर पिघलने से हजारों घर तबाह हो गए। सीएम के अनुसार, ये प्राकृतिक आपदाएं दरअसल प्रकृति की अंतिम चेतावनी हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना आत्मघाती होगा।

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