Himachal: हाईकाेर्ट ने रद्द किया एकल पीठ का फैसला, शारीरिक शिक्षा अध्यापकों की भर्ती में निर्धारित योग्यता में छूट देने से इंकार

Edited By Vijay, Updated: 17 Jan, 2026 10:57 PM

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प्रदेश हाईकोर्ट ने भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के विपरीत शारीरिक शिक्षा अध्यापकों के पद पर नियुक्ति प्रदान करने बाबत निर्धारित योग्यता में छूट देने से इंकार कर दिया है। एकल पीठ ने एक वर्ष का शारीरिक शिक्षा का डिप्लोमा करने वाले अभ्यर्थियों को भी पीईटी...

शिमला (मनोहर): प्रदेश हाईकोर्ट ने भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के विपरीत शारीरिक शिक्षा अध्यापकों के पद पर नियुक्ति प्रदान करने बाबत निर्धारित योग्यता में छूट देने से इंकार कर दिया है। एकल पीठ ने एक वर्ष का शारीरिक शिक्षा का डिप्लोमा करने वाले अभ्यर्थियों को भी पीईटी के पदों के लिए पात्र ठहराने के आदेश दिए थे। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया व न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि एकल न्यायाधीश द्वारा पारित विवादित निर्णय न्यायिक जांच की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है और तदनुसार इसे निरस्त किया जाता है। खंडपीठ ने कहा कि एक बार की छूट दिए जाने पर, याचिकाकर्त्ताओं को कुल 125 पीईटी पदों में से 62 बैचवार पदों के लिए विधिवत विचार किया गया। भाग लेने के बाद भी असफल रहने पर, उन्हें भविष्य की रिक्तियों के विरुद्ध दावा करने का कोई अधिकार नहीं है। याचिकाकर्त्ताओं को, जो 10 जनवरी, 2011 को अधिसूचित नए नियमों के तहत अपात्र थे, उन्हें इन पदों के विरुद्ध नियुक्त करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरोज कुमार मामले में दिए गए फैसले का लाभ, जिसमें याचिकाकर्त्ता पात्र नहीं थे, याचिकाकर्त्ताओं और अन्य समान उम्मीदवारों को नहीं दिया जा सकता है। यहां तक कि वर्ष 2011-2012 में पीईटी के 125 पदों को भरने के लिए चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी याचिकाकर्त्ताओं और इसी तरह के अन्य लोगों को रिक्त या भविष्य में रिक्त पदों पर नियुक्ति का कोई अधिकार नहीं है। न ही रिट न्यायालय वैधानिक नियमों को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए इस तरह के निर्देश पारित कर सकता है कि याचिकाकर्त्ताओं को छूट दी जाए और भविष्य में रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए उन पर विचार किया जाए। कोई भी व्यक्ति या आवेदक सरकार को याचिकाकर्त्ताओं को पात्र उम्मीदवारों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। ऐसा करना "असमानों को समान मानना" है, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के मूल सिद्धांतों का पूर्ण उल्लंघन होगा। छूट को भी अधिकार के रूप में नहीं मांगा जा सकता है और ऐसी छूट राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है, बशर्ते कि पीईटी पद के लिए 2011 के वैधानिक नियमों के नियम 18 में निहित पूर्व शर्तों को पूरा किया जाए।

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