Sirmaur: शिलाई के हाई प्रोफाइल मामले में सरकार का बड़ा एक्शन, अब ये कमेटी करेगी 307 पेड़ों के अवैध कटान की जांच

Edited By Vijay, Updated: 14 Mar, 2026 02:46 PM

government takes major action in high profile case of shilai

जिला सिरमौर के शिलाई क्षेत्र में निजी भूमि पर चीड़ के पेड़ों के कथित अवैध कटान के हाई प्रोफाइल बन चुके मामले में अब बड़े स्तर पर जांच शुरू हो गई है।

नाहन/पांवटा साहिब (आशु/कपिल): जिला सिरमौर के शिलाई क्षेत्र में निजी भूमि पर चीड़ के पेड़ों के कथित अवैध कटान के हाई प्रोफाइल बन चुके मामले में अब बड़े स्तर पर जांच शुरू हो गई है। उद्योग मंत्री के गृह क्षेत्र में सामने आए इस मामले के बाद सत्ता और विपक्ष दोनों के बीच ही इसकी गूंज सुनाई दे रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग के शिमला स्थित मुख्यालय ने इस पूरे प्रकरण की जांच का जिम्मा वन मंडल नाहन के डीएफओ अवनी भूषण रॉय को सौंप दिया है। सरकार ने इस मामले में एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी अवैध कटान प्रकरण की जांच करेगी। कमेटी में वन मुख्यालय से शिमला फ्लाइंग स्क्वायड के डीएफओ को भी शामिल किया गया है। कमेटी को जल्द रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। 

बताया जा रहा है कि जांच के दौरान कमेटी स्थानीय लोगों के बयान दर्ज कर सकती है। जांच के दायरे में संबंधित वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी आ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार वन विभाग ने मौके पर काटे गए पेड़ों की लकड़ी को भी सीज कर लिया है, जिसकी पैमाइश की जा रही है। बता दें कि 12 मार्च को पंजाब केसरी ने इस बात के संकेत दे दिए थे कि इस मामले में किसी अन्य डिवीजन के डीएफओ स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में उच्च स्तरीय जांच हो सकती है। अब डीएफओ स्तर के 2 अधिकारियों को टीम में शामिल कर जांच शुरू कर दी गई है। 

ऐसे सामने आया था मामला
इस मामले ने उस समय तूल पकड़ा, जब शिलाई के पूर्व भाजपा विधायक बलदेव तोमर ने कथित अवैध कटान वाले इलाके के ड्रोन शॉट्स सोशल मीडिया पर सांझा किए। इसके बाद मामला इतना बढ़ गया कि इसकी गूंज राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गई और विपक्ष सरकार को घेरने में जुट गया। सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह मामला चंद दिनों में ही हाई प्रोफाइल बन गया। वन विभाग की मानें तो संबंधित व्यक्ति को पहले 25 चीड़ के पेड़ काटने की अनुमति दी गई थी, लेकिन वह अनुमति भी समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद 307 पेड़ों को काट दिया गया। अब जांच कमेटी इस बात की भी जांच करेगी कि इतने बड़े स्तर पर कुछ ही घंटों में यह अवैध कटान किसके इशारे पर हुआ और इस पूरे प्रकरण में कौन-कौन लोग शामिल हैं। 

बीओ और फोरैस्ट गार्ड पहले ही निलंबित, अन्य कर्मी भी राडार पर
हालांकि बढ़ते दबाव के बीच वन विभाग द्वारा संबंधित क्षेत्र के वन खंड अधिकारी (बीओ) और एक फोरैस्ट गार्ड को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। अब इस प्रकरण में निलंबित कर्मचारियों की क्या भूमिका रही, इसकी भी जांच कमेटी कर सकती है। यह भी संभव है कि जांच के दायरे में अन्य संबंधित अधिकारी और कर्मचारी भी आ जाएं। कथित अवैध कटान करने वाले व्यक्ति के खिलाफ शिलाई पुलिस थाना में पहले ही केस दर्ज किया जा चुका है और पुलिस भी इस पूरे प्रकरण की जांच में जुटी हुई है।

सवाल: क्या अधिकारियों को भनक ही नहीं लगी?
पेड़ कटान प्रकरण में कई सवाल खड़े कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि केवल 25 पेड़ काटने की अनुमति दी गई थी और वह भी समाप्त हो चुकी थी तो फिर सैंकड़ों पेड़ आखिर कैसे काट दिए गए। जानकारों का मानना है कि दिनदहाड़े कटर मशीनों की आवाज और इतने बड़े स्तर पर पेड़ों का कटान बिना किसी की नजर में आए होना संभव नहीं है। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को इसकी भनक नहीं लगी या फिर कहीं न कहीं निगरानी में चूक हुई। 

क्या कहते हैं वन मंडल नाहन के डीएफओ
वन मंडल नाहन के डीएफओ अवनी भूषण रॉय ने बताया कि विभाग द्वारा गठित जांच कमेटी मामले की जांच कर रही है। मौके का निरीक्षण किया गया है। पूरे प्रकरण से जुड़े तथ्यों को एकत्रित किया जा रहा है। फिलहाल जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष तरीके से पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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