Mandi: प्रेम संबंध का ढोंग रचने वाले बाप-बेटी को कोर्ट का झटका, ब्याज सहित लौटाने होंगे 14 लाख रुपए

Edited By Vijay, Updated: 18 Apr, 2026 04:37 PM

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जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंडी की अदालत ने 14 लाख रुपए की रिकवरी से जुड़े एक मामले में प्रतिवादियों को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए पिता-पुत्री की अपील को खारिज कर दिया है।

मंडी (रजनीश): जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंडी की अदालत ने 14 लाख रुपए की रिकवरी से जुड़े एक मामले में प्रतिवादियों को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए पिता-पुत्री की अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि प्रतिवादी यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहे कि यह राशि शादी के तोहफे या स्त्रीधन के रूप में दी गई थी।

क्या था मामला?
मामला वर्ष 2012 का है, जब पंडोह निवासी और हाईड्रो प्रोजैक्ट के ठेकेदार सतपाल ने रोहड़ू (शिमला) के रहने वाले विनय सूद और उनकी बेटी कविता सूद के खिलाफ 14 लाख रुपए की वसूली का मुकद्दमा दायर किया था। सतपाल के अनुसार प्रतिवादियों ने अपने हार्डवेयर व्यवसाय को घाटे से उबारने के लिए उनसे मदद मांगी थी। सतपाल ने मानवीय आधार पर तीन चैकों के माध्यम से उन्हें कुल 14 लाख रुपए का ऋण दिया था। बाद में, जब सतपाल ने अपनी राशि वापस मांगी तो प्रतिवादियों ने पैसे लौटाने से इंकार कर दिया और उलटा सतपाल पर ही झूठे आरोप मढ़ने शुरू कर दिए।

स्त्रीधन और प्रेम संबंधों का दावा खारिज
प्रतिवादियों ने तर्क दिया था कि सतपाल और कविता के बीच प्रेम संबंध थे और सतपाल ने कविता से शादी का वायदा किया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि 14 लाख रुपए शादी के सामान की खरीद के लिए स्त्रीधन के रूप में दिए गए थे। हालांकि, अदालत ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि सतपाल पहले से ही विवाहित हैं और कविता के भी पहले दो विवाह हो चुके हैं। चूंकि दोनों में से किसी ने भी अपने पूर्व विवाहों के कानूनी अलगाव (तलाक) के सबूत पेश नहीं किए, इसलिए कानून की नजर में उनके बीच किसी भी कथित विवाह को मान्यता नहीं दी जा सकती। गौरतलब है कि इससे पहले कविता द्वारा सतपाल के खिलाफ दायर घरेलू हिंसा अधिनियम का केस भी खारिज हो चुका है, क्योंकि वह सतपाल के साथ कोई भी घरेलू रिश्ता साबित करने में नाकाम रही थी।

अधिकार क्षेत्र का तर्क भी पड़ा कमजोर
सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों ने यह तर्क दिया था कि मंडी की अदालत को इस मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है। लेकिन, जिरह के दौरान कविता ने खुद स्वीकार किया कि 2 जुलाई, 2012 को वह अपने पिता के साथ सतपाल के घर पंडोह गई थी, जहाँ उन्हें ये चैक सौंपे गए थे। इसे देखते हुए अदालत ने माना कि चूंकि चैक मंडी जिला के पंडोह में दिए गए, इसलिए मंडी अदालत का अधिकार क्षेत्र पूरी तरह वैध है।

ब्याज सहित लौटाने होंगे पैसे
अदालत ने 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर प्रतिवादियों द्वारा की गई आपत्ति को भी खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया कि एक बार जब यह साबित हो गया है कि पैसा चैक के माध्यम से दिया गया और प्रतिवादियों ने उसे भुनाया है, तो वे इसे लौटाने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं। अब प्रतिवादियों को सतपाल ठाकुर को 14 लाख रुपए की मूल राशि के साथ-साथ ब्याज का भुगतान करना होगा।

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