Himachal: देव आस्था के आगे बौने साबित हुए खतरनाक पहाड़, देवरथ को रस्सी से खींचकर करवाया पार

Edited By Vijay, Updated: 23 Nov, 2025 07:00 AM

devrath pulled across with a rope

हिमाचल को देवभूमि यूं ही नहीं कहा जाता है। यहां पर जगह-जगह पर अटूट देव आस्था के प्रमाण मिलते हैं। बड़ी से बड़ी चुनौती भी लोगों की देवताओं के प्रति आस्था को डोल नहीं पाती है।

बालीचौकी (फरेंद्र ठाकुर): हिमाचल को देवभूमि यूं ही नहीं कहा जाता है। यहां पर जगह-जगह पर अटूट देव आस्था के प्रमाण मिलते हैं। बड़ी से बड़ी चुनौती भी लोगों की देवताओं के प्रति आस्था को डोल नहीं पाती है। यहां चाहे बारिश-बर्फबारी या खतरनाक पहाड़ों पर से देवरथ को पार करवाना क्यों न हो, उनकी आस्था ही पहाड़ों को उनके सामने बौने साबित कर देती है, लेकिन लोगों में अपने देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा और विश्वास बरकरार रहता है। दरअसल मंडी जिले की सराज घाटी के भाटकीहार के गढ़पति छांजणु 18 वर्ष बाद इन दिनों अपने ऐतिहासिक दौरे पर निकले हुए हैं।

9 गढ़ की परिक्रमा कर बचाव का सूत्र बांध रहे देवता 
देवभूमि हिमाचल प्रदेश पर आपदा के बाद अब आने वाली बड़ी विपदा पर विराम लगाने के लिए देवता 9 गढ़ की परिक्रमा कर बचाव का सूत्र बांध रहे हैं। इस बीच देवरथ को पहाड़ों के खतरनाक रास्तों से निकलना हारियानों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। इसी कड़ी में शनिवार को सैंकड़ों हारियानों ने घाटलूगढ़ की सीधी चढ़ाई से देवरथ को रस्सियों से बांधकर सुरक्षित पार निकाला है। तीन घंटे की कड़ी मशक्कत में हारियानों के आगे कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन आस्था के आगे पहाड़ बौने साबित हुए हैं। रोमांच और आध्यात्मिक के इस सफर की इन दिनों देव समाज में खूब सराहना की जा रही है। देवलुओं में सनी ठाकुर, हेमराज, गोपी चंद, सुरेश ठाकुर और विशाल ने बताया कि देवता को पहाड़ के उस पार ले जाना किसी जोखिम से कम नहीं था, लेकिन देवता के बल और शक्ति ने देवलुओं में जोश भरा है। उन्होंने बताया कि वैसे तो देवरथ को उठाने के लिए दो लोगों की जरूरत होती है, लेकिन ऐसी स्थिति में आगे और पीछे चार लोग बैठे हैं। देवलुओं ने बताया कि गांव-गांव पहुंचकर श्रद्धालुओं द्वारा देवता का अखरोट और पुष्प वर्षा के साथ स्वागत किया जा रहा है।

देवता ने देव स्थलों की पवित्रता का ध्यान और देव नीति का पालन करने के दिए हैं आदेश
बता दें कि देवता छांजणु ने समय रहते ही देवभूमि के पहाड़ों की प्राकृतिक संपदा का संरक्षण, देव स्थलों की पवित्रता का ध्यान और देव नीति का सही से पालन करने के मानव जाति को आदेश दिए हैं। अगर ऐसा नहीं होता है तो देवता भी विनाश को देखने के लिए विवश हो जाएंगे। अगर इस विनाश के खेल से बचना है तो इंसान को समय रहते राजनीति, समाज नीति और देव नीति में विध्वंस उत्पन्न करने वाले अनुचित कार्यों के अंजाम से दूर रहना होगा। उधर, देवता कमेटी के प्रधान बीरबल ने बताया कि देवता में 9 गढ़ सराज की परिक्रमा कर अनहोनी से बचाव का सूत्र बांधा है। यह ऐतिहासिक परिक्रमा 18 दिनों तक चली है, जिसमें देवलुओं ने अनेक कठिनाइयों को पार कर साहस का परिचय दिया है। प्रधान ने बताया कि देवता ने 10 नवम्बर को भाटकीहार से लाव-लश्कर के साथ गढ़ परिक्रमा का शुभारंभ किया था।

ऐसी आपदा फिर न आए, प्रभावितों ने देवता से मांगा आशीर्वाद
9 गढ़ सराज के गांव-गांव पहुंचे देवता के पास प्रभावितों ने अपना दुखड़ा सुनाया है। इस दौरान उनकी आंखों में अपने आशियानों को खोने का दुख साफ नजर आ रहा था, जिस पर देवता भी भावुक हुए हैं। देवभूमि पर ऐसी आपदा दोबारा न आए इसके लिए प्रभावितों ने देवता से बचन मांग सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद मांगा है। प्रभावित भीम सेन और झाबे राम ने बताया कि देवता ने मानव जाति से देव नियमों का पालन करने के आदेश दिए हैं, तभी आपदा को देवभूमि से देवता दूर रखेंगे।

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