Edited By Jyoti M, Updated: 16 Mar, 2026 03:23 PM

जहाँ लोग मान चुके थे कि सर्दियाँ विदा हो रही हैं, वहीं कुदरत ने अचानक 'यू-टर्न' ले लिया है। मार्च के महीने में हुई इस बारिश और ओलावृष्टि ने न केवल पारे को नीचे गिराया है, बल्कि अलमारियों में बंद हो चुके ऊनी कपड़ों को भी बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया...
हिमाचल डेस्क। जहाँ लोग मान चुके थे कि सर्दियाँ विदा हो रही हैं, वहीं कुदरत ने अचानक 'यू-टर्न' ले लिया है। मार्च के महीने में हुई इस बारिश और ओलावृष्टि ने न केवल पारे को नीचे गिराया है, बल्कि अलमारियों में बंद हो चुके ऊनी कपड़ों को भी बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया है। यह सिर्फ मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि सूखती फसलों के लिए एक 'कुदरती वरदान' की तरह आया है।
शक्तिपीठ में आस्था और ठंड का संगम
कांगड़ा स्थित माता ब्रजेश्वरी देवी के दरबार में नज़ारा बदला-बदला दिखा। कल तक जो श्रद्धालु हल्के कपड़ों में नजर आ रहे थे, वे आज जैकेट और शॉल में लिपटे दिखाई दिए। सुबह से जारी रिमझिम फुहारों ने मंदिर परिसर में ऐसी ठंडक घोल दी कि हर कोई ठिठुरता नजर आया। हालांकि, कड़ाके की इस शीतलहर पर भक्तों की श्रद्धा भारी पड़ी और बारिश के बीच भी लंबी कतारें कम नहीं हुईं।
हमीरपुर और धर्मपुर के ऊंचे क्षेत्रों में स्थिति और भी ठंडी रही। अवाहदेवी-टीहरा इलाके में सोमवार को न सिर्फ बारिश हुई, बल्कि जमकर ओले भी गिरे। इस ओलावृष्टि ने तापमान को एकाएक इतना कम कर दिया कि लोग दिन में ही अंगीठी और हीटरों का सहारा लेने लगे। बाजारों में भी सन्नाटा पसरा रहा और लोगों ने घरों के भीतर ही दुबकना बेहतर समझा।
अंब उपमंडल के किसानों के लिए यह बारिश किसी उत्सव से कम नहीं है। लंबे सूखे ने गेहूं और सरसों की खेती को संकट में डाल दिया था, लेकिन सोमवार की इस हलचल ने खेतों की प्यास बुझा दी है।
विशेषज्ञों और किसानों का मानना है कि इस नमी से दानों की गुणवत्ता और पैदावार में सुधार होगा। नमी बढ़ने से फलों के बगीचों को भी राहत मिली है।
स्थानीय निवासियों का कहना है: "हमे लगा था गर्मी आ गई है, लेकिन प्रकृति ने फिर से अहसास करा दिया कि अभी सर्दियों की विदाई में वक्त बाकी है।"