Shimla: RDG बंद करने पर CM सुक्खू ने घेरी केंद्र सरकार, बाेले-कुशल वित्तीय प्रबंधन के साथ राजस्व बढ़ाने के लिए लेने हाेंगे कड़े फैसले

Edited By Vijay, Updated: 06 Feb, 2026 11:06 PM

cm sukhvinder singh sukhu

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद किए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि इस फैसले से राज्य को लगभग 50 हजार करोड़ रुपए का भारी नुक्सान होगा।

शिमला (ब्यूरो): हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद किए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि इस फैसले से राज्य को लगभग 50 हजार करोड़ रुपए का भारी नुक्सान होगा। उन्होंने इस स्थिति से निपटने के लिए कुशल वित्तीय प्रबंधन और राजस्व बढ़ाने हेतु कड़े फैसले लेने की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्यमंत्री गुरुवार को प्रदेश सचिवालय में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विधायकों की प्राथमिकताओं को निर्धारित करने हेतु आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस पहले दिन के पहले सत्र में ऊना, हमीरपुर और सिरमौर जिलों के विधायकों ने भाग लिया।

केंद्रीय बजट में मध्यम वर्ग और किसानों की पूरी तरह अनदेखी
सुक्खू ने केंद्र सरकार के आगामी बजट की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें मध्यम वर्ग और किसानों की पूरी तरह अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार कृषि एवं बागवानी है, लेकिन केंद्रीय बजट में बागवानों के लिए न तो किसी सब्सिडी का प्रावधान है और न ही बुनियादी ढांचे के विकास का कोई जिक्र है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि भानुपल्ली-बिलासपुर एवं चंडीगढ़-बद्दी रेल परियोजनाओं के विस्तार के लिए भी केंद्र सरकार ने कोई ठोस घोषणा नहीं की है, जो प्रदेश के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। सुक्खू ने इस बजट को को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म (सहकारी संघवाद) की भावना के विरुद्ध बताते हुए कहा कि यह हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे पहाड़ी राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की बजाय उन्हें कर्ज के बोझ तले दबाने का प्रयास है। उन्होंने केंद्र सरकार से आरडीजी को तत्काल बहाल करने और प्रदेश को विशेष आर्थिक पैकेज देने की मांग की।

16वें वित्त आयोग का फैसला पहाड़ी राज्यों के लिए घातक
मुख्यमंत्री ने 16वें वित्त आयोग द्वारा संविधान के अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत राज्यों को मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान राशि को बंद करने के फैसले को पहाड़ी राज्यों के लिए घातक करार दिया। उन्होंने कहा कि यह अनुदान वर्ष 1952 से लेकर 15वें वित्त आयोग तक राज्यों की वित्तीय स्थिरता के लिए निरंतर मिलता रहा है, जिसे 16वें वित्त आयोग ने पहली बार बंद किया है। सुक्खू ने कहा कि ऐसा करना हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी व कठिन भौगोलिक परिस्थिति वाले राज्य के प्रति घोर अन्याय है।

देश के पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हिमाचल 
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि हिमाचल प्रदेश पेड़ों के कटान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर देश के पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। साथ ही, प्रदेश से बहने वाली नदियों के माध्यम से अन्य राज्यों को पानी भी उपलब्ध करवाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा आरडीजी बंद करना प्रदेश के हितों के साथ कुठाराघात है। सुक्खू ने बताया कि 15वें वित्त आयोग ने हिमाचल प्रदेश के लिए 37,199 करोड़ रुपए के राजस्व घाटा अनुदान की सिफारिश की थी। इसके अलावा, कोरोना काल के दौरान पिछली भाजपा सरकार को वित्त आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर आरडीजी के रूप में 11,431 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सहायता मिली थी। अनुदान बंद होने से राज्य को अब लगभग 50 हजार करोड़ रुपए का नुक्सान होगा।

नाबार्ड से 713.87 करोड़ रुपए की 73 योजनाएं स्वीकृत 
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने वर्ष 2025-26 के दौरान नाबार्ड से 713.87 करोड़ रुपए की 73 योजनाएं स्वीकृत करवाई हैं। इनमें लोक निर्माण विभाग से संबंधित 512.31 करोड़ रुपए की 55 विधायक प्राथमिकता योजनाएं और जल शक्ति विभाग की 201.56 करोड़ रुपए की 18 विधायक प्राथमिकता योजनाएं शामिल हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि बजट का पूर्ण उपयोग किया जाए और नाबार्ड कार्यालय में प्रतिपूर्ति दावे 15 मार्च से पहले जमा किए जाएं। मार्च 2026 तक नाबार्ड से और अधिक विधायक प्राथमिकताओं को स्वीकृत करवाने के लिए प्रदेश सरकार प्रयासरत है। राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया ने इस अवसर पर आशा व्यक्त की कि विधायकों की तरफ से दिए गए बहुमूल्य सुझावों से प्रदेश में विकास की गति को बढ़ावा मिलेगा। बैठक में उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, विभिन्न विभागों के प्रशासनिक सचिव, विभागाध्यक्ष, संबंधित उपायुक्त तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

जिलेवार विधायकों की मांगें
जिला ऊना

  • चिंतपूर्णी के विधायक सुदर्शन बबलू ने चिंतपूर्णी मंदिर के विस्तार के लिए 130 करोड़ रुपए प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया। उन्होंने स्तोथर पुल और चौकीमन्यार कॉलेज का काम शीघ्र पूरा करने की मांग की। उन्होंने जोल में सब फायर स्टेशन बनाने और सड़कों के नैटवर्क को मजबूत करने का आग्रह किया।
  • गगरेट के विधायक राकेश कालिया ने गगरेट अस्पताल के लिए 2 करोड़ रुपए प्रदान करने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए इसे पूरा करने के लिए शेष धनराशि जल्द जारी करने की मांग की। उन्होंने भद्रकाली आई.टी.आई. भवन तथा 6 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं के भवनों का निर्माण कार्य पूरा करने का आग्रह किया। उन्होंने दौलतपुर चौक व मुबारिकपुर के लिए सीवरेज सुविधा तथा फ्लड प्रोटेक्शन के लिए समुचित धनराशि की मांग की।
  • ऊना के विधायक सतपाल सत्ती ने नगर निगम ऊना में शामिल नए गांवों के लिए सीवरेज स्कीम बनाने की मांग की। उन्होंने शहर की ड्रेनेज व्यवस्था मजबूत करने, संतोषगढ़-ऊना पुल का निर्माण करने तथा बीडीओ ऑफिस का निर्माण कार्य पूरा करने की मांग की। उन्होंने भभौर साहिब सिंचाई योजना को सुदृढ़ करने का भी अनुरोध किया।
  • कुटलैहड़ के विधायक विवेक शर्मा ने अपने क्षेत्र में जल शक्ति विभाग को विभिन्न स्कीमों के लिए 36.89 करोड़ रुपए प्रदान करने तथा नई पीने के पानी की स्कीम के लिए 14.93 करोड़ रुपए स्वीकृत करने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बंगाणा में सीवरेज स्कीम का काम पूरा करने, बंगाणा-शांतला सड़क तथा थानाकलां-भाखड़ा सड़क को सुदृढ़ करने की मांग की। उन्होंने बंगाणा में सब जज कोर्ट खोलने का भी आग्रह किया।

जिला हमीरपुर

  • भोरंज के विधायक सुरेश कुमार ने लदरौर-पट्टा पीने के पानी की स्कीम का निर्माण शीघ्र करने की मांग की। उन्होंने भोरंज नगर पंचायत में आधारभूत संरचना मजबूत करने का आग्रह किया। उन्होंने सब जज कोर्ट का नया भवन बनाने और भोरंज में सीवरेज स्कीम बनाने की मांग की। उन्होंने भोरंज में क्रिटिकल केयर यूनिट के लिए 23.75 करोड़ रुपए देने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
  • सुजानपुर के विधायक रणजीत सिंह ने बीडीओ ऑफिस तथा पीएचसी चबूतरा के भवनों का निर्माण कार्य जल्द पूरा करने का आग्रह किया। उन्होंने टौणीदेवी-ऊहल-कक्कड़-जंगलबैरी सड़क को स्तरोन्नत करने की मांग की। उन्होंने टौणी देवी और सुजानपुर अस्पतालों में खाली पड़े डॉक्टरों के पदों को भरने का अनुरोध किया।
  • बड़सर के विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने बड़सर और भोटा में नया बस अड्डा बनाने का आग्रह किया। उन्होंने क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने का अनुरोध किया। उन्होंने रैली जजरी स्कूल का नया भवन बनाने और पीएचसी चकमोह को शुरू करने की मांग की। उन्होंने दियोटसिद्ध से वोल्वो बस तथा बड़सर-एम्स बस चलाने का आग्रह किया।

जिला सिरमौर

  • पच्छाद की विधायक रीना कश्यप ने अपने क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि हाब्बन घाटी, शिरगुल महाराज और भूरेश्वर महादेव मंदिर में पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला हाब्बन का निर्माण शीघ्र पूरा करने की मांग की।
  • नाहन के विधायक अजय सोलंकी ने नाहन मेडिकल कॉलेज का मुद्दा उठाया और कार्डियोलॉजी विभाग बनाने के साथ-साथ स्टाफ नर्सों के पदों को भरने की मांग की। उन्होंने क्षेत्र में 3 सड़कों के निर्माण को स्वीकृति देने के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए भोजपुर पुल बनाने का अनुरोध किया। उन्होंने बिजली के कम वोल्टेज की समस्या का निवारण करने का भी आग्रह किया।
  • श्री रेणुकाजी के विधायक विनय कुमार ने अपने क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की मांग करते हुए कहा कि श्री रेणुकाजी झील की डिसिल्टिंग की जानी चाहिए। उन्होंने श्री रेणुकाजी चिड़ियाघर में शेर लाने की प्रक्रिया को तेज करने की मांग की। उन्होंने सड़क नेटवर्क मजबूत करने, आदर्श स्वास्थ्य संस्थान संगड़ाह में स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ करने, ददाहू में कॉलेज भवन और बस स्टैंड का निर्माण करने तथा बिजली विभाग का डिवीजन संगड़ाह में खोलने की मांग की।
  • पांवटा साहिब के विधायक सुखराम चौधरी ने अपने क्षेत्र में शिक्षण संस्थानों के निर्माणाधीन भवनों का कार्य शीघ्र पूरा करने की मांग की। उन्होंने हिमाचल और उत्तराखंड को जोड़ने वाले नावघाट पुल का निर्माण कार्य जल्द पूरा करने तथा सड़क नैटवर्क सुदृढ़ करने का आग्रह किया। उन्होंने गिरि सिंचाई नहरों की मरम्मत करने और पांवटा औद्योगिक क्षेत्र में बिजली लोड ठीक करने की मांग की।

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