हिमाचल के स्कूलों में AI का बड़ा फेर! छठी कक्षा की पाठ्य पुस्तक किन्नौर जिला बना 'ट्रांसजैंडर'

Edited By Vijay, Updated: 29 Apr, 2026 07:53 PM

class 6 textbook turns kinnaur district into transgender

हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में इस शैक्षणिक सत्र से शुरू किए गए अंग्रेजी माध्यम के प्रयोग पर सवालिया निशान लग गए हैं। छठी कक्षा की पाठ्य पुस्तक 'हिमाचल की लोक संस्कृति और योग' के अंग्रेजी अनुवाद में मशीनी कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) का ऐसा इस्तेमाल किया...

सोलन (ब्यूरो): हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में इस शैक्षणिक सत्र से शुरू किए गए अंग्रेजी माध्यम के प्रयोग पर सवालिया निशान लग गए हैं। छठी कक्षा की पाठ्य पुस्तक 'हिमाचल की लोक संस्कृति और योग' के अंग्रेजी अनुवाद में मशीनी कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) का ऐसा इस्तेमाल किया गया है कि कई जगहों पर अर्थ का अनर्थ हो गया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ट्रांसलेशन के बाद इन पुस्तकों की प्रूफ रीडिंग तक नहीं करवाई गई, जिससे त्रुटिपूर्ण पुस्तकें सीधे बच्चों के हाथों में पहुंच गईं।

पुस्तक में हुई गलतियां इतनी गंभीर हैं कि भूगोल और इतिहास का मजाक बन गया है। पुस्तक के पृष्ठ संख्या 16 और 37 पर जिला किन्नौर का अनुवाद ट्रांसजैंडर (किन्नर) कर दिया गया है। एक प्रश्न में जिलों के गठन के बारे में पूछा गया है, जिसके विकल्पों में बिलासपुर, कांगड़ा, कुल्लू, डलहौजी के साथ-साथ ट्रांसजैंडर शब्द लिखा गया है, जबकि हिंदी संस्करण में यहां सही शब्द किन्नौर था। इसी तरह, पृष्ठ संख्या 37 पर दी गई सूची में भी जिला किन्नौर के स्थान पर ट्रांसजैंडर छपा हुआ है। सिर्फ नाम ही नहीं, बल्कि तथ्यों और आंकड़ों में भी बड़ी गड़बड़ियां पाई गई हैं। पुस्तक के पृष्ठ संख्या 17 पर वर्ष 1972 को '19712' और पृष्ठ संख्या 43 पर 5302 को '53027' के रूप में प्रिंट किया गया है। इन गंभीर गलतियों से स्पष्ट है कि प्रकाशन से पहले कंटेंट की कोई जांच-परख नहीं की गई।

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अब टीजीटी संघ ने उठाई आवाज
इस मामले पर अब राजकीय टीजीटी कला संघ ने कड़ी आपत्ति जताई है। संघ के राज्य महासचिव विजय हीर ने इन त्रुटियों को सुधारने की मांग करते हुए कहा कि मशीनी अनुवाद को बिना जांचे-परखे प्रिंट करना शिक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है। विजय हीर ने मांग की कि पिछले 16 वर्षों से पढ़ाई जा रही इस विषय की पुस्तक का अंग्रेजी अनुवाद तुरंत जांचा जाए और आने वाले सत्र से इन त्रुटियों को पूरी तरह हटाया जाए। साथ ही, संघ ने मांग की है कि स्कूलों में हिंदी माध्यम की पुस्तकें भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करवाई जाएं ताकि बच्चों की शिक्षा बाधित न हो।

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