बगलामुखी रोपवे अब निजी हाथों में सौंपा, किराया बढ़ा...9 पंचायतों की छूट खत्म

Edited By Jyoti M, Updated: 03 Apr, 2026 12:45 PM

baglamukhi ropeway handed over to private hands fares increased

मंडी जिले के पंडोह में स्थित प्रसिद्ध माता बगलामुखी रोपवे के संचालन में बड़ा बदलाव किया गया है। अब इसकी पूरी कमान सरकारी निगम (RTDC) के बजाय निजी कंपनी 'स्की हिमालयास' को सौंप दी गई है। इस बदलाव के साथ ही रोपवे का सफर महंगा हो गया है, जिससे स्थानीय...

हिमाचल डेस्क। मंडी जिले के पंडोह में स्थित प्रसिद्ध माता बगलामुखी रोपवे के संचालन में बड़ा बदलाव किया गया है। अब इसकी पूरी कमान सरकारी निगम (RTDC) के बजाय निजी कंपनी 'स्की हिमालयास' को सौंप दी गई है। इस बदलाव के साथ ही रोपवे का सफर महंगा हो गया है, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।

निजी हाथों में कमान और नया अनुबंध

पहले इस रोपवे का संचालन राज्य पर्यटन विकास निगम (RTDC) करता था, जो रखरखाव के लिए निजी कंपनी को हर महीने करीब 15 लाख रुपये देता था। लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत संचालन का सारा खर्च (बिजली, डीजल, मेंटेनेंस) स्की हिमालयास कंपनी खुद उठाएगी।

इसके बदले कंपनी RTDC को सालाना 27.14 लाख रुपये देगी, जिसमें हर साल 10% की बढ़ोतरी होगी। RTDC के अधिकारियों के अनुसार, बढ़ते खर्चों के कारण यह कदम उठाना पड़ा है।

किराया बढ़ा और पंचायतों की छूट हुई खत्म

संचालन बदलते ही किराए की दरों में भी बदलाव किया गया है। पहले जो टिकट 350 रुपये का था, अब वह 400 रुपये का हो गया है। 2025 की आपदा के समय 9 पंचायतों को रियायत दी गई थी, जिसे अब घटाकर मात्र 3 पंचायतों तक सीमित कर दिया गया है। अन्य पंचायतों के लोगों को अब पूरा किराया देना होगा।

अब सामान ले जाने पर भी वजन के हिसाब से पैसे देने होंगे। 30 किलो तक 30 रुपये और उससे अधिक पर 1 रुपये प्रति किलो का शुल्क लगेगा। गैस सिलेंडर और डीजल जैसे तरल पदार्थों के लिए 2 रुपये प्रति लीटर चुकाने होंगे।

स्थानीय लोगों में भारी रोष

इस फैसले का स्थानीय निवासियों और जन प्रतिनिधियों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि बखाली-कुकलाह मुख्य मार्ग अभी भी पूरी तरह ठीक नहीं हुआ है। बारिश होते ही रास्ता बंद हो जाता है।

जब तक कुकलाह के लिए नया पुल और सड़क पूरी तरह तैयार नहीं हो जाते, तब तक पुरानी रियायतें (50 रुपये किराया) जारी रहनी चाहिए। पर्यटन सीजन के दौरान किराया बढ़ाना श्रद्धालुओं और उन ग्रामीणों के साथ अन्याय है जिनके लिए यह रोपवे आज भी जीवनरेखा (Lifeline) बना हुआ है। स्थानीय नेताओं और ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि बुनियादी सुविधाएं बहाल होने से पहले किराए में यह बढ़ोतरी जनहित में नहीं है।

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