Edited By Vijay, Updated: 24 Mar, 2026 04:51 PM

डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों और ब्लैकमेलिंग के मामलों को देखते हुए भारत सरकार ने सख्त कदम उठाया है। विशेषकर बिना सहमति के निजी और अंतरंग सामग्री सांझा करने वालों पर नकेल कसने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत नई मानक संचालन प्रक्रिया...
शिमला (संतोष): डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों और ब्लैकमेलिंग के मामलों को देखते हुए भारत सरकार ने सख्त कदम उठाया है। विशेषकर बिना सहमति के निजी और अंतरंग सामग्री सांझा करने वालों पर नकेल कसने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की गई है। हिमाचल प्रदेश के डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं शासन विभाग के प्रवक्ता ने इस नई एसओपी और साइबर सुरक्षा से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा की है।
क्या है एनसीआईआई सामग्री?
प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि एनसीआईआई के दायरे में ऐसी कोई भी तस्वीर या वीडियो आता है, जिसमें किसी व्यक्ति के निजी अंगों को दर्शाया गया हो, पूर्ण या आंशिक नग्नता प्रदर्शित की गई हो, या यौन क्रियाएं शामिल हों। इसके अलावा किसी व्यक्ति की 'डीपफेक' या तकनीक से बदली गई तस्वीरों को भी इसी श्रेणी में रखा गया है। सरकार ने इसे किसी भी व्यक्ति की निजता और गरिमा का गंभीर उल्लंघन माना है और इसके खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान किया है।
पीड़ित कहां और कैसे दर्ज करवाएं अपनी शिकायत?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार के साइबर अपराध का शिकार होता है, तो घबराने की बजाय वह तुरंत निम्नलिखित माध्यमों से सहायता प्राप्त कर सकता है:
- सबसे पहले जिस वैबसाइट या ऐप पर सामग्री डाली गई है, वहां उपलब्ध रिपोर्ट विकल्प का उपयोग करें या उस प्लेटफॉर्म के शिकायत निवारण अधिकारी से संपर्क कर कंटैंट हटवाएं।
- पीड़ित अपनी शिकायत सीधे राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज करवा सकते हैं। इसके अलावा त्वरित पुलिस सहायता के लिए टोल-फ्री साइबर हैल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल करें।
- महिलाएं इस तरह के मामलों में विशेष सहायता और परामर्श के लिए अपने नजदीकी वन स्टॉप सैंटर से संपर्क कर सकती हैं।
- पीड़ित कानूनी कार्रवाई के लिए अपने किसी भी नजदीकी पुलिस थाने में जाकर सीधे एफआईआर दर्ज करवा सकते हैं।
समाधान न मिलने पर जीएसी पोर्टल पर करें अपील
प्रवक्ता ने बताया कि अब सोशल मीडिया कंपनियों की मनमानी नहीं चलेगी। यदि तय समय के भीतर संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आपकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं करता है, या पीड़ित उनके द्वारा किए गए समाधान से संतुष्ट नहीं है, तो वह न्याय के लिए अपनी शिकायत अपीलीय समिति (जीएसी) के सरकारी पोर्टल पर दर्ज कर सकता है।
नागरिकों से अपील, आपत्तिजनक सामग्री को आगे शेयर न करें
सरकार और विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इंटरनेट की दुनिया में सतर्क रहें। यदि उन्हें किसी व्यक्ति की कोई ऐसी आपत्तिजनक या हानिकारक सामग्री प्राप्त होती है, तो उसे आगे शेयर बिल्कुल न करें। ऐसी घटना की तुरंत पुलिस को सूचना देना न केवल पीड़ित की गरिमा की रक्षा करता है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाने में भी मदद करता है।
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