103 की उम्र और सेवा का जुनून! किन्नौर के बुजुर्ग किसान ने 2 सरकारी स्कूलों को लिया गोद, संवारेंगे बच्चों का भविष्य

Edited By Swati Sharma, Updated: 15 Mar, 2026 06:46 PM

a 103 year old farmer from kinnaur has adopted two government schools

Kinnaur News: हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में 103 वर्षीय किसान भगत राम सरयान ने समाज के लिए प्रेरणादायक कदम उठाया है। उन्होंने क्षेत्र के दो सरकारी स्कूलों को गोद लेकर वहां शिक्षा सुविधाओं को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी उठाई है। उनकी इस पहल की...

Kinnaur News: हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में 103 वर्षीय किसान भगत राम सरयान ने समाज के लिए प्रेरणादायक कदम उठाया है। उन्होंने क्षेत्र के दो सरकारी स्कूलों को गोद लेकर वहां शिक्षा सुविधाओं को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी उठाई है। उनकी इस पहल की स्थानीय लोगों द्वारा सराहना की जा रही है।

यादों और कृतज्ञता का कर्ज

चांसू गांव के निवासी भगत राम सरयान ने राजकीय केंद्रीय पाठशाला सांगला और प्राथमिक पाठशाला चांसू को गोद लेने का निर्णय लिया है। सरयान पेशे से किसान हैं और अपनी उदार सोच के लिए इलाके में जाने जाते हैं। उन्होंने क्षेत्र के बच्चों के बेहतर भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह पहल की है। बताया जा रहा है कि भगत राम सरयान ने राजकीय केंद्रीय प्राथमिक पाठशाला सांगला से खुद शिक्षा ग्रहण की थी, जबकि प्राथमिक पाठशाला चांसू में उनके बच्चों ने पढ़ाई की। अब जीवन के इस पड़ाव पर उन्होंने अपनी माटी और अपनी पाठशाला का कर्ज उतारने के लिए इन दोनों स्कूलों के उत्थान का बीड़ा उठाया है।

लाइब्रेरी से लेकर फर्नीचर तक, होगा कायाकल्प

चांसू गांव के पूर्व प्रधान अनिल नेगी के अनुसार, भगत राम सरयान इन स्कूलों में निजी शिक्षण संस्थानों की तर्ज पर सुविधाएं विकसित करेंगे।
प्राथमिक पाठशाला चांसू की लाइब्रेरी भवन को अपग्रेड कर आधुनिक बनाया जाएगा, जबकि सांगला स्कूल के भवन की मरम्मत के साथ-साथ छात्रों के लिए नया फर्नीचर उपलब्ध कराया जाएगा।

बेटे कर रहे देश की सेवा, पिता संवार रहे भविष्य

भगत राम सरयान का परिवार भी सेवा भाव से ओत-प्रोत है। उनका एक बेटा सरकारी अधिकारी के रूप में सेवा दे रहा है, जबकि दूसरा बेटा सीमा पर देश की रक्षा में तैनात है। पूर्व प्रधान अनिल नेगी ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को उनके घर के पास ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें निजी स्कूलों की ओर न भागना पड़े। यह पहल न केवल किन्नौर बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणा बन गई है।

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