Cabinet Meeting: डिजास्टर एक्ट हटाने के बाद पंचायत चुनाव रोस्टर पर सरकार ने लिया बड़ा फैसला

Edited By Vijay, Updated: 07 Mar, 2026 06:25 PM

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डिजास्टर एक्ट को हटाए जाने के बाद राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव रोस्टर को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। इसके तहत हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (निर्वाचन) नियम, 1994 के नियम 28, 87, 88 और 89 में....

शिमला (कुलदीप): डिजास्टर एक्ट को हटाए जाने के बाद राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव रोस्टर को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। इसके तहत हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (निर्वाचन) नियम, 1994 के नियम 28, 87, 88 और 89 में प्रस्तावित संशोधनों पर आम जनता से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित करने का निर्णय लिया है। प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार वर्ष 2010 को आधार वर्ष मानते हुए जो पंचायतें लगातार 2 कार्यकाल तक आरक्षित रही हैं, उन्हें आगामी पंचायत चुनावों में आरक्षित नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में प्रदेश सचिवालय में आयोजित मंत्रिमंडल बैठक में यह निर्णय लिया गया। यानी यदि किसी पंचायत में लगातार 2 बार आरक्षण रहा है, तो वह अब आरक्षित नहीं होगी।

राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने मंत्रिमंडल बैठक के बाद प्रदेश सचिवालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि नवगठित पंचायतों में वर्ष, 2011 की जनगणना को आधार बनाकर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव रोस्टर को लेकर निर्णय इसलिए लिया गया है, ताकि बार-बार पंचायत किसी एक श्रेणी के लिए आरक्षित न हो। उन्होंने कहा कि ऐसा देखने को मिला है कि कई पंचायतें 2 से 3 बार एक ही श्रेणी के लिए आरक्षित थीं, जिस कारण यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल वित्तीय हालात के बावजूद राज्य सरकार पंचायत चुनाव को लोकतांत्रिक तरीके से करवाएगी।

चंडीगढ़-शिमला-चंडीगढ़ हैली टैक्सी सप्ताह में भरेगी 12 उड़ानें
बैठक में चंडीगढ़-शिमला-चंडीगढ़ हैलीकॉप्टर टैक्सी सेवा को सप्ताह में 3 उड़ानों से बढ़ाकर 12 उड़ानें करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। अब 6 दिनों तक प्रतिदिन 2 उड़ानें संचालित होंगी और इसके संचालन को सुचारू रखने के लिए राज्य सरकार की तरफ से वायबिलिटी गैप फंडिंग प्रदान की जाएगी।

सामाजिक सुरक्षा पैंशन में संशोधन, पति की तरफ से छोड़ी महिला होगी निराश्रित
बैठक में सामाजिक सुरक्षा पैंशन नियम, 2010 में संशोधन को भी स्वीकृति दी गई, जिसके तहत निराश्रित शब्द को अधिक स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है तथा लाभ प्राप्त करने के लिए प्रमाणन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार वे महिलाएं जिन्हें उनके पति ने छोड़ दिया है, जो उनके साथ नहीं रह रही हैं और जिनकी आय का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है, उन्हें निराश्रित महिला माना जाएगा।

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