Edited By Swati Sharma, Updated: 03 Mar, 2026 11:37 AM

Shimla News: हिमाचल प्रदेश के सीबीएसई (CBSE) से संबद्ध सरकारी स्कूलों में दाखिले की भारी भीड़ और कमरों की कमी को देखते हुए शिक्षा निदेशालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। शिक्षा निदेशक आशीष कोहली द्वारा जारी नए आदेशों के अनुसार, अब राज्य के उन सभी...
Shimla News: हिमाचल प्रदेश के सीबीएसई (CBSE) से संबद्ध सरकारी स्कूलों में दाखिले की भारी भीड़ और कमरों की कमी को देखते हुए शिक्षा निदेशालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। शिक्षा निदेशक आशीष कोहली द्वारा जारी नए आदेशों के अनुसार, अब राज्य के उन सभी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को दो शिफ्टों में संचालित किया जा सकेगा, जहां छात्रों की संख्या अधिक है और अतिरिक्त सेक्शन बनाने के लिए जगह उपलब्ध नहीं है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
प्रदेश की सुक्खू सरकार ने अब तक 148 स्कूलों को सीबीएसई बोर्ड के तहत चलाने का निर्णय लिया है। इन स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और अंग्रेजी माध्यम के प्रति बढ़ते आकर्षण के कारण प्रवेश के लिए छात्रों का भारी दबाव देखा जा रहा है। सीमित बुनियादी ढांचे के कारण किसी भी योग्य छात्र को शिक्षा से वंचित न रहना पड़े, इसलिए यह वैकल्पिक व्यवस्था तुरंत प्रभाव से लागू कर दी गई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि राज्य के वह सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल दो शिफ्टों में संचालित किए जा सकेंगे, जहां सीटें भर चुकी हैं और अतिरिक्त सेक्शन बनाना संभव नहीं है।
नई व्यवस्था के मुख्य बिंदु
- जूनियर और सीनियर शिफ्ट: सुबह की शिफ्ट में प्राथमिक/कनिष्ठ कक्षाएं लगेंगी, जबकि दोपहर के बाद की शिफ्ट में वरिष्ठ कक्षाओं का संचालन किया जाएगा।
- अस्थायी प्रावधान: यह व्यवस्था केवल उन स्कूलों के लिए है जहां आधारभूत ढांचे की कमी है। जहां सेक्शन बढ़ाना संभव होगा, वहां यह नियम लागू नहीं होगा।
- स्वेच्छा का अधिकार: अभिभावकों पर शिफ्ट चुनने का दबाव नहीं बनाया जाएगा। यदि वे शिफ्ट से सहमत नहीं हैं, तो वे अपनी सुविधा अनुसार नजदीकी अन्य सरकारी स्कूल का विकल्प चुन सकते हैं।
- सुरक्षा और अनुशासन: स्कूलों को दो शिफ्टों के दौरान परिसर की स्वच्छता, सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
भविष्य की योजना: स्कूलों का विलय और नई भर्तियां
शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में पर्याप्त आधारभूत ढांचा उपलब्ध हो जाता है, तो आसपास के कम छात्र संख्या वाले स्कूलों के विलय या डाउनग्रेडिंग पर भी विचार किया जा सकता है। इसके साथ ही, इन 148 सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के रिक्त पदों को भरने के लिए नई भर्तियों की प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जाएगी।
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