यहां हारियान की मर्जी को मान लेता है देवता

Edited By Updated: 17 Oct, 2016 12:49 AM

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अठारह करड़ू की सौह ढालपुर में लगने वाले देव महाकुंभ में जिला के कई देवी-देवता रघुनाथ जी की रथ यात्रा में शामिल नहीं होते।

कुल्लू: अठारह करड़ू की सौह ढालपुर में लगने वाले देव महाकुंभ में जिला के कई देवी-देवता रघुनाथ जी की रथ यात्रा में शामिल नहीं होते। जिला के कई देवी-देवता रघुनाथ जी के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए सुल्तानपुर स्थित रघुनाथ जी के मंदिर में हाजरी तो भरते है लेकिन रथ यात्रा में भाग न लेकर ढालपुर स्थित अपने अस्थायी शिविरों में विराजमान रहते हैं और लंका दहन के दिन भी रथ यात्रा में भाग नहीं लेते हैं।


खास बात है कि कई देवता हारियान की मर्जी के बिना रथ यात्रा में भाग नहीं लेते हैं, ऐसा ही एक देवता बंजार घाटी के पल्दी गांव के तहत आने वाले बड़ागांव के आराध्य देवता छमाहूं हंै। देवलु बताते है कि दशहरा उत्सव में भाग लेने के लिए देवता छमाहूं ढालपुर तो पहुंचते हंै लेकिन कभी-कभार ही रघुनाथ जी की रथ यात्रा में भाग लेते हैं। हालाकि देवता और हारियान दशहरे से संबंधित जुड़ी प्राचीन देव परंपराओं का पूरा सम्मान करते हैं। देवता छमाहूं के कारकून तथा हारियान कई बार अपनी व्यस्तता के चलते देवता को रघुनाथ जी की रथ यात्रा में नहीं ले जाते हैं।

हैरत की बात है कि हारियानों की मर्जी को देवता भी मान लेता है। गौर रहे कि इस बार भी हारियानों की व्यस्तता के कारण देवता छमाहूं ने रथ यात्रा में भाग नहीं लिया। देवता छमाहूं के कारदार मोहन सिंह कहते हैं कि देवता कभी-कभार ही रघुनाथ जी की रथ यात्रा में भाग लेता है। देवलुओं की व्यस्तता के चलते देवता को रथयात्रा में ले जाना मुश्किल हो जाता है। हालाकि गत वर्ष रघुनाथ जी की रथ यात्रा में देवता ने भाग लिया था लेकिन इस बार हारियानों की व्यस्तता के चलते रथ यात्रा में भाग नहीं लिया और न हीं लंका दहन के दिन भाग लेंगे।

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