Edited By Vijay, Updated: 22 Feb, 2026 09:54 PM

छोटी काशी के नाम से विख्यात मंडी में अंतर्राष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव का समापन एक अद्भुत और सदियों पुरानी देव परंपरा के साथ हुआ। महोत्सव के अंतिम चरण में उत्तरशाल क्षेत्र के अधिष्ठाता देवता आदि ब्रह्मा ने मंडी शहर की खुशहाली, समृद्धि और सुरक्षा...
मंडी (फरेंद्र): छोटी काशी के नाम से विख्यात मंडी में अंतर्राष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव का समापन एक अद्भुत और सदियों पुरानी देव परंपरा के साथ हुआ। महोत्सव के अंतिम चरण में उत्तरशाल क्षेत्र के अधिष्ठाता देवता आदि ब्रह्मा ने मंडी शहर की खुशहाली, समृद्धि और सुरक्षा के लिए पारंपरिक ‘कार’ बांधने की रस्म निभाई। इस अलौकिक नजारे को देखने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
गूरों ने तलवारों के साथ किया देव नृत्य
‘कार’ बांधने की यह प्रक्रिया इंदिरा मार्कीट स्थित सिद्धकाली मंदिर के मुख्य द्वार से विधिवत शुरू हुई और सेरी बाजार तक चली। देव रथ के आगे पारंपरिक वेशभूषा में सजे देवलू और कार-कारिंदे वाद्ययंत्रों की थाप पर चल रहे थे। इस दौरान देवता के गूरों ने हाथों में नंगी तलवारें लेकर जो देव नृत्य किया, उसने पूरे माहौल को शक्ति और भक्ति से भर दिया। यह दृश्य अत्यंत प्रभावशाली था।
बुरी शक्तियों के नाश के लिए हवा में उछाला जाै का आटा
परिक्रमा के दौरान एक अनूठी परंपरा देखने को मिली। देवता के देवलुओं ने जौ के आटे को गुलाल की तरह हवा में उछाला। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह अनुष्ठान शहर से बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए किया जाता है। माना जाता है कि जौ का आटा हवा में बिखेरने से नगर में सकारात्मकता और शांति का संचार होता है। नगर की सुरक्षा का यह चक्र पूरा करने के बाद देवता आदि ब्रह्मा अपने लगभग 400 देवलुओं के साथ ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते-गाते अपने मूल स्थान की ओर आगे बढ़े। इस रस्म के साथ ही मंडी वासियों ने अपने आराध्य देवताओं से अगले वर्ष फिर आने की कामना की।
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