बोर्ड ने 10वीं के संस्कृत पेपर में पूछे ऐसे प्रश्न कि छात्रों के उड़ गए होश

Edited By Vijay, Updated: 05 Mar, 2020 08:46 PM

when flying senses of students after see the sanskrit paper of 10th class

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की 10वीं कक्षा के संस्कृत विषय के पेपर में भ्रमित करने वाले प्रश्नों ने परीक्षार्थियों को परेशानी में डाल दिया। वीरवार से शुरू हुई 10वीं कक्षा की परीक्षा के पहले ही दिन संस्कृत विषय के पेपर में कुछ प्रश्नों में...

मंडी (ब्यूरो): हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की 10वीं कक्षा के संस्कृत विषय के पेपर में भ्रमित करने वाले प्रश्नों ने परीक्षार्थियों को परेशानी में डाल दिया। वीरवार से शुरू हुई 10वीं कक्षा की परीक्षा के पहले ही दिन संस्कृत विषय के पेपर में कुछ प्रश्नों में गलतियों के कारण विद्यार्थी भ्रमित हो गए। परीक्षा के प्रश्न पत्र की सीरीज-ए के प्रश्न नंबर-11 में घड़ी में 10.45 दर्शाए गए हैं और 11.45 का समय पूछा गया है। इस सीरीज के प्रश्न नंबर-17 के (ग) भाग में उत्तर के लिए दिए गए विकल्पों में स्पष्टता न होने के कारण विद्यार्थियों में भ्रामक स्थिति उत्पन्न हो गई। प्रश्न-17 के ही (ङ) भाग में शुद्ध भावार्थ चुनने के लिए कहा गया परंतु तीनों ही सही उत्तर दे दिए गए, जिससे छात्रों में असमंजस पैदा हो गया।
PunjabKesari, Question Paper Image

सीरीज-बी में भी प्रश्न नंबर-11 की घड़ी में 10.45 दर्शाए गए और प्रश्न 11.45 का पूछा गया, जिससे छात्रों को भ्रमित होना पड़ा। इसी प्रकार सीरीज-सी के प्रश्न नंबर-17 के (ङ) भाग में भी सीरीज-ए की ही तरह उत्तर के लिए दिए गए विकल्पों में स्पष्टता न होने के कारण बच्चों में असमंजस पैदा हो गया। प्रश्न-19 में भूपति शब्द का अर्थ दिने दे दिया, जिससे पूरे प्रश्न में ही बच्चे भ्रमित होकर रहे गए। इसके अतिरिक्त भी पूरे प्रश्न पत्र में हलंत और विसर्गों की गलतियां भी रहीं, जिससे छात्रों को भ्रमित होना पड़ा।

इन सभी गलतियों को देखते हुए हिमाचल राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. मनोज शैल सहित संस्कृत शिक्षकों ने शिक्षा बोर्ड से मांग की है कि छात्रों को इन गलतियों के अतिरिक्त अंक दिए जाएं। उन्होंने बोर्ड से यह भी मांग की है कि परीक्षा पत्र मूल्यांकन करने वाले अध्यापकों को भी बोर्ड की तरफ से ये निर्देश दिए जाएं कि प्रिंटिंग की वजह से हलंत और विसर्ग की गलतियों को नजरअंदाज किया जाए ताकि प्रश्न पत्रों में हुई गलतियों का नुक्सान बच्चों को न हो सके।

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