Edited By Kuldeep, Updated: 12 Feb, 2026 06:14 PM

पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के दिल्ली दौरे और रैवेन्यू डैफिसिट ग्रांट के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया है।
सुंदरनगर (सोढी): पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के दिल्ली दौरे और रैवेन्यू डैफिसिट ग्रांट के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया है। सुंदरनगर में मीडिया से बातचीत में जयराम ठाकुर ने दावा किया कि मुख्यमंत्री सुक्खू आरडीजी बंद होने के मामले को लेकर केंद्र के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी में हैं और इसी कानूनी मशबिरे के लिए उन्होंने दिल्ली में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम से विशेष मुलाकात की है। जयराम ठाकुर ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के हितों की रक्षा करना जायज है, लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा केंद्र सरकार को कोसना और टकराव का रास्ता अपनाना प्रदेश के भविष्य के लिए घातक सिद्ध होगा।
नेता प्रतिपक्ष ने कटाक्ष किया कि मुख्यमंत्री को न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न ही जेपी नड्डा से मिलने का समय मिला, यहां तक कि उनकी ही पार्टी के प्रमुख नेता राहुल और प्रियंका गांधी ने भी उन्हें तवज्जो नहीं दी, जिससे उनकी दिल्ली यात्रा केवल एक विफल कवायद बनकर रह गई है। उन्होंने अपने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि जब उनके समय में आरडीजी रुकी थी, तब उन्होंने केंद्र के समक्ष शालीनता और मजबूती से पक्ष रखकर उसे बहाल कराया था जबकि वर्तमान सरकार केवल दोषारोपण की राजनीति कर रही है। जयराम ने राज्य सरकार पर आगामी विधानसभा सत्र को लेकर विधायकों को गुमराह करने और आरडीजी के बहाने अपनी चुनावी गारंटियों से पल्ला झाड़ने का गंभीर आरोप लगाया।
अपराधी बेलगाम और सरकार बनी मूकदर्शक
जयराम ठाकुर ने प्रदेश की चरमराती कानून व्यवस्था पर चिंता जताते हुए रोष व्यक्त किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी के विधानसभा क्षेत्र में एक मिड-डे मील कर्मचारी महिला की नृशंस हत्या, शिमला पुलिस सहायता कक्ष के बाहर पिछले वर्ष हुए मर्डर, नालागढ़ में पुलिस थाने के बाहर हुए आतंकी बम धमाके और चम्बा में युवक की लाश बोरी में डालकर नाले में फैंकने जैसी हत्या मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि देवभूमि के इतिहास में आज तक ऐसी आतंकी घटनाएं और बेखौफ अपराध कभी नहीं देखे गए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि गृह विभाग स्वयं उनके पास होने के बावजूद अपराधी बेलगाम हैं और सरकार केवल मूकदर्शक बनी हुई है, जिसका जवाब उन्हें सदन के भीतर देना होगा।