सीएम सुक्खू का बड़ा ऐलान: सरकार लाएगी नई 'स्क्रैप पॉलिसी', विभागों को मिली हिदायत

Edited By Jyoti M, Updated: 25 Mar, 2026 09:47 AM

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हिमाचल प्रदेश के सरकारी दफ्तर अब 'कबाड़' के बोझ से आजाद होने जा रहे हैं। अक्सर फाइलों और पुराने फर्नीचर के बीच दबे रहने वाले सरकारी गलियारों में अब नई जगह और ताजगी नजर आएगी।

हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश के सरकारी दफ्तर अब 'कबाड़' के बोझ से आजाद होने जा रहे हैं। अक्सर फाइलों और पुराने फर्नीचर के बीच दबे रहने वाले सरकारी गलियारों में अब नई जगह और ताजगी नजर आएगी। प्रदेश सरकार एक ऐसी व्यापक स्क्रैप पॉलिसी लाने की तैयारी में है, जो न केवल परिसरों का चेहरा बदलेगी, बल्कि सरकारी खजाने को भी करोड़ों का फायदा पहुंचाएगी।

सीएम सुक्खू का बड़ा ऐलान

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश के सरकारी संस्थानों को 'कबाड़ मुक्त' बनाने की अपनी योजना साझा की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आने वाली कैबिनेट बैठक में एक विशेष नीति का प्रस्ताव लाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों, अस्पतालों और पुलिस थानों में सालों से जमा अनुपयोगी सामान को वैज्ञानिक तरीके से हटाना है।

क्यों जरूरी हुई यह पॉलिसी?

विधानसभा सत्र के दौरान कुछ अहम मुद्दे सामने आए जिन्होंने इस नीति की जरूरत को पुख्ता किया। कई स्कूलों में पुराने डेस्क और मेडिकल कॉलेजों में कंडम मशीनें कमरों को घेरे हुए हैं, जिससे कामकाज प्रभावित हो रहा है। विधायक केवल सिंह पठानिया ने उदाहरण दिया कि उनके क्षेत्र में एक सरकारी बुलडोजर पिछले दो दशकों से सड़क किनारे लावारिस खड़ा है। करोड़ों रुपये का लोहा और मशीनरी जंग खा रही है। समय पर नीलामी होने से सरकार को बड़ी कमाई हो सकती है।

विभागों को मिली सख्त हिदायत

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हर विभाग को एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपने परिसर की सफाई करनी होगी। सिर्फ फर्नीचर ही नहीं, बल्कि सालों से खड़े पुराने वाहनों को भी इस पॉलिसी के तहत स्क्रैप किया जाएगा।

पारदर्शिता और वैज्ञानिक तरीका

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने इस मुद्दे की गंभीरता पर मुहर लगाते हुए कहा कि वर्तमान में उद्योग विभाग इस पर काम कर रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि इस स्क्रैप का निपटान पूरी तरह पारदर्शी हो और पर्यावरण के अनुकूल (Scientific Disposal) तरीके से किया जाए, ताकि स्वच्छता के साथ-साथ सौंदर्य भी बढ़े।

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