Edited By Jyoti M, Updated: 21 Mar, 2026 12:45 PM

हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी के लिए आज का दिन किसी 'अग्निपरीक्षा' से कम नहीं है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में अपनी सरकार का चौथा बजट पेश करते हुए एक ऐसे भविष्य की नींव रखी है, जहाँ राज्य बाहरी मदद के बजाय अपने पैरों पर खड़ा हो सके।
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी के लिए आज का दिन किसी 'अग्निपरीक्षा' से कम नहीं है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में अपनी सरकार का चौथा बजट पेश करते हुए एक ऐसे भविष्य की नींव रखी है, जहाँ राज्य बाहरी मदद के बजाय अपने पैरों पर खड़ा हो सके।
यह बजट केवल एक वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि केंद्र से मिलने वाली राजस्व घाटा ग्रांट (RDG) के बंद होने से पैदा होने वाले शून्य को भरने की एक साहसी कोशिश है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका लक्ष्य 2032 तक हिमाचल को भारत का सबसे समृद्ध राज्य बनाना है।
अन्नदाता के लिए नई रणनीति: किसान आयोग का उदय
हिमाचल की खेती-किसानी को नई दिशा देने के लिए सरकार ने राज्य किसान आयोग के गठन का बड़ा फैसला लिया है। सुक्खू सरकार अब 'बीज गांव' विकसित करने पर जोर देगी, ताकि पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीक और सब्सिडी का सहारा मिल सके। यह कदम पहाड़ी उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
MSP का नया कीर्तिमान
प्रदेश के इतिहास में पहली बार सरकार ने न केवल एमएसपी के दायरे को बढ़ाया है, बल्कि कुछ फसलों के दामों में भारी उछाल भी किया है। प्राकृतिक गेहूं अब 60 के बजाय 80 रुपये प्रति किलो पर खरीदा जाएगा। मक्की की कीमत 40 से बढ़ाकर 50 रुपये कर दी गई है। पांगी के जौ और हल्दी के दामों में भी जबरदस्त बढ़ोतरी की गई है। पहली बार 30 रुपये प्रति किलो का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) अदरक के लिए तय किया गया है, जो अदरक उत्पादक बेल्ट के लिए एक बड़ी राहत है।
मछुआरों के लिए सरकारी सुरक्षा कवच
पशुपालन और मत्स्य पालन के क्षेत्र को 500 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से संजीवनी दी गई है। जलाशयों से पकड़ी गई मछली के लिए 100 रुपये का न्यूनतम भाव सुनिश्चित किया गया है। इस नई योजना के तहत मछुआरों को आर्थिक मदद दी जाएगी। विशेष रूप से, नई नाव खरीदने पर सरकार 70% की भारी सब्सिडी प्रदान करेगी।