Edited By Jyoti M, Updated: 21 Mar, 2026 12:19 PM

हिमाचल प्रदेश के आर्थिक इतिहास में आज का दिन एक महत्वपूर्ण मील के पत्थर के रूप में दर्ज हो गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने कार्यकाल का चौथा बजट पेश करते हुए राज्य के भविष्य का खाका खींचा।
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश के आर्थिक इतिहास में आज का दिन एक महत्वपूर्ण मील के पत्थर के रूप में दर्ज हो गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने कार्यकाल का चौथा बजट पेश करते हुए राज्य के भविष्य का खाका खींचा। यह बजट केवल वित्तीय आंकड़ों का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि 2032 तक हिमाचल को देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने के विजन का एक रणनीतिक ब्लूप्रिंट भी है।
आर्थिक चुनौतियाँ और 'मिशन 2032'
यह बजट एक ऐसे समय में आया है जब राज्य के सामने गंभीर वित्तीय चुनौतियाँ हैं। 1 अप्रैल से केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली राजस्व घाटा ग्रांट (RDG) समाप्त हो रही है, जिससे राज्य की वित्तीय आत्मनिर्भरता की परीक्षा होनी तय है।
पशुपालकों और किसानों के लिए बड़ी घोषणाएं
बजट का मुख्य केंद्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालन रहा। मुख्यमंत्री ने कृषि और पशुपालन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं। सरकार ने पशुपालकों को बड़ी राहत देते हुए दूध के समर्थन मूल्य में 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है।
गाय का दूध: अब 51 रुपये के बजाय 61 रुपये प्रति लीटर खरीदा जाएगा।
भैंस का दूध: अब 61 रुपये के बजाय 71 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जाएगा।
भेड़पालन व्यवसाय को पुनर्जीवित करने के लिए 300 करोड़ रुपये की एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू करने की घोषणा की गई है। चरवाहों के लिए 'डिजिटल कार्ड' की व्यवस्था की जाएगी और उन्हें जीवन बीमा की सुविधा भी प्रदान की जाएगी, जिससे उनकी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
मुख्यमंत्री सुक्खू का यह बजट स्पष्ट रूप से "आत्मनिर्भर हिमाचल" की संकल्पना पर आधारित है।