Edited By Swati Sharma, Updated: 21 Mar, 2026 06:43 PM

हिमाचल डेस्क : हिमाचल प्रदेश की चरमराती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने और अपने सहयोगियों के वेतन पर कैंची चला दी है। बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रदेश की गंभीर वित्तीय स्थिति को देखते...
हिमाचल डेस्क : हिमाचल प्रदेश की चरमराती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने और अपने सहयोगियों के वेतन पर कैंची चला दी है। बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रदेश की गंभीर वित्तीय स्थिति को देखते हुए आगामी 6 महीनों के लिए मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और आला अधिकारियों के वेतन का एक निश्चित हिस्सा अस्थाई रूप से रोका जाएगा।
इन कर्मचारियों के लिए राहत
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि उनका अपना वेतन का 50 प्रतिशत, मंत्रियों के वेतन का 30 प्रतिशत और विधायकों के वेतन का 30 प्रतिशत अगले छह महीने के लिए अस्थायी रूप से रोका गया है। वहीं, जिला न्यायाधीशों के वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा रोकने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि यह कटौती केवल उच्च पदों पर बैठे लोगों के लिए है। थर्ड और फोर्थ क्लास (तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी) के सभी कर्मचारियों को उनका पूरा वेतन समय पर मिलता रहेगा। वहीं, हाई कोर्ट के न्यायाधीशों के मामले में सीएम ने कहा कि वे अपने विवेक से इस पर फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं।
क्यों लेना पड़ा यह सख्त फैसला?
सीएम सुक्खू ने सदन को जानकारी दी कि पिछली सरकारों के समय से चली आ रही वेतन और पेंशन की देनदारियां अब बढ़कर करीब 13,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई हैं। उन्होंने कहा, "यह फैसला अस्थाई है। जैसे ही राज्य की आर्थिक स्थिति पटरी पर आएगी, रोकी गई पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।" मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और सभी भुगतान व्यवस्थित तरीके से किए जाएंगे।
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