Edited By Kuldeep, Updated: 15 Mar, 2026 06:19 PM

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा आगामी 21 मार्च को पेश किए जाने वाले बजट से पहले सोमवार को हिमाचल प्रदेश पैंशनर्ज संयुक्त संघर्ष समिति सभी जिला मुख्यालयों में धरने-प्रदर्शन का आयोजन कर अपनी आवाज बुलंद करेगी।
शिमला (राक्टा): मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा आगामी 21 मार्च को पेश किए जाने वाले बजट से पहले सोमवार को हिमाचल प्रदेश पैंशनर्ज संयुक्त संघर्ष समिति सभी जिला मुख्यालयों में धरने-प्रदर्शन का आयोजन कर अपनी आवाज बुलंद करेगी। इस दौरान सभी जिलाधीशों को एक ज्ञापन भी सौंपा जाएगा। इसे लेकर पूरी रणनीति तैयार की जा चुकी है। बजट में पैंशनर्ज के लंबित वित्तीय लाभों के भुगतान को प्राथमिकता देने के लिए यह प्रदेशव्यापी शक्ति प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से पैंशनर्ज की विभिन्न देनदारियां लंबित पड़ी हुई हैं, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में वर्ष 2026-27 के बजट में देनदारियों के भुगतान के लिए पर्याप्त प्रावधान किया जाना जरूरी है।
समिति के अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि बजट पेश करते समय पैंशनर्ज की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए ठोस निर्णय लिए जाएं। उन्होंने कहा कि पैंशनर्ज की लड़ाई किसी राजनीतिक विचारधारा से नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और सम्मानजनक जीवन से जुड़ी है। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री से पैंशनर्ज की संयुक्त परामर्श समिति (जेसीसी) की बैठक जल्द बुलाने की मांग दोहराई है, ताकि लंबित मामलों का समाधान बातचीत के जरिए किया जा सके। वहीं समिति ने चेताया है कि यदि बजट में पैंशनर्ज की मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
तो 30 मार्च को होगी राज्य स्तरीय रैली
भूप राम वर्मा ने कहा है कि सोमवार को आयोजित होने वाले धरने प्रदर्शन के बाद भी यदि सरकार ठोक कदम नहीं उठाती है तो आगामी 30 मार्च को राज्य स्तरीय रैली का आयोजन करेगी। उन्होंने कहा कि पैंशनर्ज की 60 से 70 प्रतिशत देनदारियां सरकार जल्द से जल्द चुकता करे। यदि यह आश्वासन मिलता है तो शिमला में 30 मार्च को प्रस्तावित राज्य स्तरीय शिमला रैली को स्थगित कर दिया जाएगा।
चौथा बजट हो रहा पेश, एक भी जेसीसी नहीं हुई
समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री अपना चौथा बजट पेश करने जा रहे हैं लेकिन 4 वर्षों से कर्मचारियों और पैंशनर्ज की लंबित मांगों को लेकर एक बार भी जेसीसी का आयोजन नहीं किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार उनके हितों को लेकर कितनी गंभीर है। पदाधिकारियों का कहना है कि समिति हर मंच से पैंशनर्ज के हितों की आवाज बुलंद करेगी।