Edited By Kuldeep, Updated: 16 Feb, 2026 09:42 PM

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि राज्य बिजली बोर्ड का किसी भी सूरत में निजीकरण नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बोर्ड को कमजोर करने के बजाय सरकार इसे और अधिक सुदृढ़ करेगी।
शिमला (भूपिन्द्र): मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि राज्य बिजली बोर्ड का किसी भी सूरत में निजीकरण नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बोर्ड को कमजोर करने के बजाय सरकार इसे और अधिक सुदृढ़ करेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि सरकारी कर्मचारियों को ओल्ड पैंशन स्कीम (ओपीएस) देने के फैसले से सरकार पीछे नहीं हटेगी, चाहे कितना ही दबाव क्यों न आए।
विधानसभा में आरडीजी (रैवेन्यू डैफिसिट ग्रांट) पर हुई चर्चा के दौरान विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हिमकेयर और सहारा जैसी जनकल्याणकारी योजनाएं भी लगातार चलाएगी। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे आरडीजी जैसे गंभीर विषय पर ठोस चर्चा करने के बजाय केवल राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं। सीपीएस और ओएसडी को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सरकार के समय भी ओएसडी को प्रधान सचिव के बराबर वेतनमान दिया जाता था। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने व्यवस्था को पारदर्शी बनाया है और भ्रष्टाचार के चोर दरवाजे बंद किए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार 17 हजार करोड़ रुपए की सीमाओं के बावजूद प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। जल जीवन मिशन के तहत पूर्व सरकार से 1150 करोड़ रुपए की देनदारी मिली। उन्होंने कहा कि सरकार ने 3 वर्ष का जश्न नहीं मनाया, बल्कि मंडी में आपदा प्रभावितों को मुआवजा दिया और मकान निर्माण के लिए भी सहायता उपलब्ध करवाई।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार सीमित संसाधनों में 7 गारंटियां पूरी कर चुकी है। सीपीएस को बचाने के लिए 10 करोड़ रुपए खर्च करने के आरोप को उन्होंने कोरा झूठ बताया। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि आरडीजी कोई मुद्दा नहीं, बल्कि हिमाचल का हक है। इसी कारण सरकार विपक्ष के नेता के नेतृत्व में केंद्र सरकार से बात करने को तैयार है।