Himachal: सीएम सुक्खू बड़ा बयान, बाेले- न OPS बंद होगी और न किसी कर्मचारी का वेतन और पैंशन रुकेगी

Edited By Vijay, Updated: 10 Feb, 2026 05:31 PM

cm sukhvinder singh sukhu

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का समय मांगा है। इस समय संसद चल रही है तथा समय मिलने पर उनसे हिमाचल के अधिकारों की बात करूंगा।

शिमला (कुलदीप): मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का समय मांगा है। इस समय संसद चल रही है तथा समय मिलने पर उनसे हिमाचल के अधिकारों की बात करूंगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार न ओपीएस को बंद होने देगी और न ही किसी कर्मचारी का वेतन और पैंशनर की पैंशन रुकेगी। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के मुद्दे पर वित्त विभाग की तरफ से दी जाने वाली प्रस्तुति में भाग लेने के लिए मैंने खुद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर को चिट्ठी भेजकर बुलाया था, लेकिन वह वित्त सचिव के माध्यम से चिट्ठी मिलने की झूठी बात बोल रहे हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू शिमला से नई दिल्ली रवाना होने से पहले पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जयराम ठाकुर ने अपने कार्यकाल के समय ट्रेजरी सरप्लस होने के बावजूद अधिकारियों व कर्मचारियों के 10 हजार करोड़ रुपए के एरियर का भुगतान नहीं किया।

मैं संघर्ष से निकला हूं, आम आदमी का दर्द जानता हूं
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि वह संघर्ष से निकले हैं तथा आम जनता, गरीब, कर्मचारी, किसान व बागवान के दर्द को जानते हैं। सरकारें आती और जाती हैं, लेकिन प्रदेश के अधिकार की लड़ाई को वह लड़ते रहेंगे।

ठेकेदार मित्रों को खुश करने के लिए बना दिए 1000 करोड़ के भवन
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आरोप लगाया कि जयराम ठाकुर ने अपने ठेकेदार मित्रों को खुश करने के लिए 1000 करोड़ रुपए के खाली भवन बना दिए। इतना ही नहीं, अपनी सरकार के अंतिम 6 महीने में 5,000 करोड़ रुपए की रेवड़ियां बांटीं। उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के समय 54,000 करोड़ रुपए की आरडीजी और 16,000 करोड़ रुपए जीएसटी कंपनसेशन मिला, लेकिन कांग्रेस सरकार को पिछले 3 वर्ष में केवल 17,000 करोड़ रुपए आरडीजी प्राप्त हुए हैं। साथ ही राज्य सरकार ने वित्तीय अनुशासन से 26,683 करोड़ रुपए अपने संसाधनों से जुटाकर अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि आरडीजी हिमाचल प्रदेश को संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत मिलने वाला अधिकार है, जिससे राजस्व घाटे को पूरा करने में मदद मिलती है। यदि हर वर्ष मिलने वाली लगभग 10,000 करोड़ रुपए की आरडीजी बंद होगी, तो हिमाचल जैसे छोटे पहाड़ी राज्य के बजट पर इसका गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने आरडीजी समाप्त किए जाने को प्रदेश के प्रति केंद्र सरकार का सौतेला व्यवहार बताया और 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करने के दिन को हिमाचल प्रदेश के इतिहास का काला दिन बताया।

जयराम व भाजपा विधायक दल को सद्बुद्धि दे भगवान
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आरोप लगाया कि जयराम ठाकुर दरअसल उनकी तरफ से बुलाई गई बैठक में आकर वित्त विभाग की प्रस्तुति को नहीं देखना चाहते थे, इस कारण वह झूठ बोले रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान जयराम ठाकुर व भाजपा विधायक दल को सद्बुद्धि दे। उन्होंने कहा कि यह किसी दल और सरकार की लड़ाई नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के वित्तीय प्रबंधन और अनुशासन का असर आने वाले समय में सुधारों के रूप में आम जनता को देखने को मिलेगा।

हमारे साथ नहीं जाना तो खुद प्रधानमंत्री से मिले भाजपा
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि यदि भाजपा विधायक दल और सांसद उनके साथ प्रधानमंत्री से नहीं मिलना चाहते, तो खुद प्रदेश हित में मिलकर प्रदेश का पक्ष रखें। हिमाचल प्रदेश कभी भी रैवेन्यू सरप्लस नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि जयराम ठाकुर भाषण देने में मस्त हैं और कह रहे हैं कि जल्द ही हमारी सरकार आने वाली है। उन्होंने कहा कि यह बड़ी शर्मनाक बात है कि कुर्सी हित के लिए नेता प्रतिपक्ष को हिमाचल के हित नजर नहीं आ रहे हैं।

धूमल गुट ने जयराम के वित्तीय कुप्रबंधन पर उठाए थे सवाल
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दावा किया कि जयराम ठाकुर के मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए धूमल गुट की तरफ से अनुराग ठाकुर ने वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि आज भी पूर्व केंद्रीय मंत्री को पूछना चाहिए कि 54,256 करोड़ रुपए की आरडीजी और 16 हजार करोड़ रुपए जीएसटी कंपनसेशन के बावजूद क्यों अधिकारियों व कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग का बकाया एरियर नहीं दिया गया।

हिमकेयर में लुटा दिए 450 करोड़
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आरोप लगाया कि जयराम ठाकुर ने अपने कार्यकाल में कुछ निजी स्वास्थ्य संस्थाओं को लाभ पहुंचाने के लिए 450 करोड़ रुपए हिमकेयर के नाम पर लुटा दिए। उन्होंने कहा कि कुछ निजी अस्पताल अच्छे हैं, लेकिन इस राशि से लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।

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