Edited By Kuldeep, Updated: 01 Feb, 2026 10:49 PM
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि 16वें वित्तायोग की सिफारिशों में राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को बंद करके हिमाचल प्रदेश के हितों से कुठाराघात हुआ है।
शिमला (कुलदीप): मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि 16वें वित्तायोग की सिफारिशों में राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को बंद करके हिमाचल प्रदेश के हितों से कुठाराघात हुआ है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली 49,000 हजार करोड़ रुपए की ग्रांट बंद होना प्रदेश के इतिहास का काला दिन है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू शिमला में पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल की बैठक में इस विषय को लेकर कानूनी विकल्प तलाशे जाएंगे, क्योंकि राज्य को आर.डी.जी. ग्रांट संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत मिलती है।
ग्रांट के बंद होने से लोगों के दिलों पर चोट पहुंची है तथा भीष्म आर्थिक संकट के बीच प्रदेश को छुनछुना थमाया गया है। उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि 70 वर्ष से मिलने वाली ग्रांट बंद होगी। इससे किसान-बागवान, मजदूर व आम आदमी के हितों से कुठाराघात हुआ है। उन्होंने कहा कि वह क्रमश: 4-4 बार केंद्रीय वित्त मंत्री व 16वें वित्तायोग अध्यक्ष से आरडीजी ग्रांट को प्रत्येक वित्तीय वर्ष 10,000 करोड़ रुपए जारी करने की मांग की थी, ताकि 5 वर्ष 50,000 करोड़ रुपए की ग्रांट मिल सके। इसके विपरीत इस ग्रांट को बंद करके प्रदेश हितों से खिलवाड़ हुआ है।
केंद्रीय बजट 2026-27 निराशाजनक व अन्यायपूर्ण
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि वित्तीय वर्ष, 2026-27 का केंद्रीय बजट हिमाचल के लिए निराशाजनक व अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वर्ष, 1952 से लेकर 15वें वित्त आयोग के गठन तक केंद्र सरकार राज्यों को आर.डी.जी. ग्रांट नियमित रूप से राज्यों को देता रहा है, लेकिन 16वें वित्तायोग की तरफ से इसको बंद करना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिए किए गए प्रावधान हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य के लिए अपर्याप्त हैं, जहां भौगोलिक परिस्थितियां और खेती की लागत देश के मैदानी राज्यों से बिल्कुल भिन्न हैं। सेब उत्पादक, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था में लगभग 5,000 करोड़ रुपए का योगदान देते हैं और हजारों परिवारों की आजीविका का आधार हैं।
आपदा से सुरक्षा, रेल, सड़क, जल विद्युत व पर्यटन को विशेष सहायता नहीं
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि केंद्र सरकार भले ही बजट में पूंजी निवेश की बात करे, लेकिन पहाड़ी राज्यों के लिए आपदा से सुरक्षा, सड़क-रेल कनैक्टिविटी, जलविद्युत, पर्यटन और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए कोई ठोस या विशेष सहायता दिखाई नहीं देती। हिमालयी राज्यों के लिए अलग आपदा जोखिम सूचकांक और पारिस्थितिक संकेतकों को वित्तीय संवितरण में प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी। इस तरह केंद्रीय बजट हिमाचल प्रदेश के लिए न विकास का रास्ता दिखाता है, न न्याय का। यह बजट जन-विरोधी, किसान-विरोधी और हिमाचल-विरोधी है।
बौद्ध सर्किट से हिमाचल को बाहर करना भेदभावपूर्ण
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों के लिए बौद्ध सर्किट का प्रस्ताव स्वागत योग्य है, लेकिन विश्व-प्रसिद्ध बौद्ध स्थलों वाले हिमाचल प्रदेश को इससे बाहर रखना स्पष्ट भेदभाव को दर्शाता है। पर्वतीय मार्गों के विकास की घोषणा तो की गई है, लेकिन वास्तविक लाभ भविष्य के अस्पष्ट दिशा-निर्देशों पर छोड़ दिया गया है।
भानुपल्ली-बिलासपुर, बद्दी-चंडीगढ़ को धन आबंटित नहीं
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि रेलवे विस्तार जैसे भानुपल्ली-बिलासपुर और बद्दी-चंडीगढ़ जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए कोई धन आबंटन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि नंगल-तलवाड़ा रेलवे लाइन वर्ष, 1971 अभी तक तलवाड़ा नहीं पहुंची। अनुराग ठाकुर को सांसद बने भी 12 वर्ष हो गए हैं, लेकिन रेललाइन फिर भी आगे नहीं बढ़ी। बिलासपुर में भूमि अधिग्रहण के लिए प्रदेश ने 25 फीसदी और बद्दी के लिए 50 फीसदी शेयर दिया, लेकिन फिर भी प्रोजैक्ट पूरा नहीं हो पाया।
भाजपा सांसद और नेताओं के नेतृत्व में जाने को तैयार
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह भाजपा सांसद और नेताओं के नेतृत्व में आरडीजी ग्रांट बहाली के लिए मिलने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश हित की लड़ाई है, जिस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।