हिमाचल अब भूकंप जोखिम की सबसे उच्च श्रेणी में, भूकंपीय जोनेशन मानचित्र में बड़ा बदलाव

Edited By Kuldeep, Updated: 07 Mar, 2026 11:08 PM

shimla himachal earthquake risk

भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा जारी संशोधित राष्ट्रीय भूकंपीय जोनेशन मानचित्र में पूरे हिमाचल प्रदेश को नव स्थापित जोन-6 में शामिल किया गया है।

शिमला (भूपिन्द्र): भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा जारी संशोधित राष्ट्रीय भूकंपीय जोनेशन मानचित्र में पूरे हिमाचल प्रदेश को नव स्थापित जोन-6 में शामिल किया गया है। इसके साथ ही प्रदेश अब देश में भूकंप जोखिम की सबसे उच्च श्रेणी में आ गया है। इससे पहले हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्से जोन-4 और जोन-5 में वर्गीकृत थे, लेकिन नए मानचित्र के अनुसार अब सभी जिलों को समान रूप से जोन-6 में रखा गया है, जिससे पहले का क्षेत्रीय अंतर समाप्त हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के बाद हिमाचल में उन्नत आपदा तैयारी, सुरक्षित निर्माण मानकों और भूकंप रोधी ढांचागत योजना पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा तैयार भूकंप परिदृश्य के अनुसार यदि प्रदेश में मध्यरात्रि के समय 8.0 तीव्रता का भूकंप आता है तो वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर लगभग 68,56,509 की आबादी प्रभावित हो सकती है। अनुमान है कि ऐसे परिदृश्य में करीब 1,60,000 लोगों की मौत और लगभग 11 लाख लोगों के घायल होने की आशंका हो सकती है।

वहीं विशेषज्ञों ने संभावित नुक्सान को कम करने के लिए कई सुझाव दिए हैं। इनमें जल निकासी प्रणाली को मजबूत करना, जल निकासी मार्गों से अतिक्रमण हटाना, असुरक्षित स्थानों पर निर्माण रोकना तथा पहाड़ियों और ढलानों की स्थिरता सुनिश्चित करना शामिल है। एनडीएमए के अनुसार हमारे पूर्वजों ने आपदाओं के अनुभव के आधार पर सुरक्षित निर्माण तकनीकों को विकसित किया था। धज्जी दीवार और काष्ठकूणी शैली से बने पारंपरिक मकान इसके उदाहरण हैं, जो भूकंप के झटकों को सहने में सक्षम माने जाते हैं। आधुनिक समय में इन निर्माण शैलियों को प्रोत्साहित करते हुए लकड़ी की जगह आरसीसी का उपयोग भी किया जा सकता है।

हिम कवच मोबाइल एप से मिलेगी तकनीकी जानकारी
सुरक्षित निर्माण दिशा-निर्देशों को लोगों तक पहुंचाने के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) ने हिम कवच नामक मोबाइल एप विकसित किया है। यह एप ग्रामीण क्षेत्रों के मकान मालिकों, पंचायती राज व ग्रामीण विकास विभाग के अभियंताओं तथा अन्य तकनीकी विशेषज्ञों को भवन निर्माण संबंधी दिशा-निर्देशों तक आसान और त्वरित पहुंच प्रदान करता है। इस एप के माध्यम से निर्माण के हर चरण में सुरक्षित और आपदा-रोधी भवन निर्माण पद्धतियों को अपनाने में सहायता मिलती है।

कांगड़ा भूकंप स्मृति में 4 अप्रैल को मनाया जाएगा आपदा जागरूकता दिवस
प्रदेश में 4 अप्रैल को कांगड़ा भूकंप की 121वीं बरसी पर आपदा जागरूकता दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर राज्य, जिला और समुदाय स्तर पर विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके अलावा 1 से 5 अप्रैल तक शिक्षण संस्थानों में आपदा जागरूकता कार्यक्रम, प्रशिक्षण और अन्य गतिविधियां भी आयोजित होंगी।

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