Shimla: हिमाचल में रोड ड्रेनेज पॉलिसी की अधिसूचना जारी, अब सड़क से निकले वाला पानी रोका तो भरना होगा जुर्माना

Edited By Vijay, Updated: 24 Feb, 2026 08:23 PM

road drainage policy

हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में सड़कों की बार-बार हो रही क्षति और बढ़ते जल-प्रवाह दबाव को देखते हुए रोड ड्रेनेज पॉलिसी को लागू कर दिया है। इसको लेकर सरकार ने मंगलवार को अधिसूचना जारी कर दी है।

शिमला (भूपिन्द्र): हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में सड़कों की बार-बार हो रही क्षति और बढ़ते जल-प्रवाह दबाव को देखते हुए रोड ड्रेनेज पॉलिसी को लागू कर दिया है। इसको लेकर सरकार ने मंगलवार को अधिसूचना जारी कर दी है। नई नीति का उद्देश्य ड्रेनेज प्लानिंग, डिजाइन, निर्माण, रखरखाव और मॉनीटरिंग के लिए एक समान व तकनीकी रूप से सुदृढ़ ढांचा तैयार करना है। नई रोड ड्रेनेज पॉलिसी के तहत सभी नए सड़क निर्माण कार्यों में वैज्ञानिक ड्रेनेज प्रावधानों को अनिवार्य कर दिया है।

ड्रेनेज डिजाइन अब सभी सड़कों के टैंडर दस्तावेजों का अनिवार्य हिस्सा होगा, साथ ही मौजूदा सड़कों पर भी इन्हें प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। नीति का उद्देश्य मानसून में होने वाले सड़क नुक्सान को कम करना, नैटवर्क की रेजिलिएंस बढ़ाना और हर मौसम में सुरक्षित कनैक्टीविटी सुनिश्चित करना है। नई नीति के अनुसार सड़क किनारे नालियों को वर्षा तीव्रता, कैचमैंट एरिया, डिस्चार्ज, मलबे के अनुमानित लोड और स्थानीय भू-स्थिति के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से डिजाइन किया जाएगा।

ग्रामीण सड़कों के मामलों में प्राकृतिक जल मार्ग, नाली स्थान और क्रॉस-ड्रेनेज संरचनाओं की पहचान पंचायत प्रस्ताव के माध्यम से दस्तावेजित करना अनिवार्य होगा। प्राइवेट या वन भूमि की स्थिति में एनओसी प्राप्त करना आवश्यक होगा। वर्ष 2023 के मानसून में लगभग 2400 करोड़ तथा वर्ष 2025 में करीब 3000 करोड़ रुपए की क्षति ड्रेनेज फेलियर और ढलान अस्थिरता के कारण दर्ज की गई। नीति में स्पष्ट किया गया है कि नए प्रोजैक्ट्स में पाइप कलवर्ट की बजाय बॉक्स कलर्वट डिफॉल्ट को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं स्लाइडिंग और सीपेज जोन में कैच-वाटर ड्रेन बनाए जाएंगे, ताकि पहाड़ी पानी सड़क तक पहुंचने से पहले नियंत्रित हो सके।

ये है कार्रवाई का प्रावधान
सड़क से निकलने वाले पानी को रोकने या मोड़ने पर पैनल्टी के साथ बहाली लागत वसूली जाएगी। जियो-टैग्ड फोटो और मोबाइल एप आधारित शिकायत प्रणाली विकसित की जाएगी। पंचायत प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त निरीक्षण और जन-जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे।

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